उन्होंने आगे शिव ज्योतिर्लिंग का प्राकट्य के बारे में बताते हुए कहा कि पूर्व काल में ब्रह्मा और श्री हरि के विवाद को समाप्त करने के लिए आदि सदाशिव ने ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए तभी से शिवलिंग पूजा का प्रचलन प्रारंभ हुआ। शिवजी अपने भक्तों को दुख रूपी विष को पान कर अमृत रूपी सुख प्रदान करते हैं इसलिए उन्हें शंकर कहा जाता है। शं, का अर्थ है सुख शांति और कर का अर्थ है करने वाला अर्थात सुख शांति करने वाले को ही शंकर कहा जाता है ।
उन्होंने यह भी कहा कि शिव का अर्थ कल्याण है, सभी जीवो के प्रति अपार स्नेह और करुणा रखना ही शिव जी का स्वाभाविक स्वभाव है, तभी तो उनके दरबार में देवताओं और मनुष्यों के साथ-साथ पशुओं को भी स्नेह और संरक्षण प्राप्त है । सिंह, बैल ,नाग, चूहा, मोर आदि शिवजी ही एकमात्र ऐसे देव हैं जिनकी आराधना दैत्य भी किया करते हैं, क्योंकि उनके दरबार में किसी भी जीव के प्रति कोई भेदभाव नहीं है, जो उनकी शरण में आते हैं उनकी मनोकामना पूर्ण कर उनकी रक्षा करते हैं। शिव महिमा का विस्तार करते हुए पंडित चौबे ने बताया कि शिवजी महान देवता होते हुए भी अपने गरीब भक्तों के सामान्य, छोटी से पूजा से ही बड़े प्रसन्न होकर उनकी इच्छा पूर्ण कर दिया करते हैं। जल बेलपत्र, धतूरा ,कनेर जैसे सामान्य वस्तु से ही रिझ जाते हैं क्योंकि भगवान भोलेनाथ वस्तु नहीं अपने भक्तों का भाव देखते हैं।
मारो के हृदय स्थल राधा कृष्ण मंदिर चौक में महाशिवपुराण की यह कथा दोपहर 2:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलती है जिससे नगर वासियों में आनंद की लहर व्याप्त है। इस शिव महापुराण कथा को श्रवण करने के लिए नगर वासियों के साथ-साथ क्षेत्र वासी भी भारी संख्या में पहुंच रहे हैं और मारो नगर शिव रटे, संकट कटे की जयकारा से गूंज उठा है !
