उर्स की रात हुआ बड़ा बवाल: वक्फ बोर्ड चेयरमेन की मौजूदगी में 3 डीजे वाहन जब्त, थाने के बाहर करीब 500 युवकों ने किया प्रदर्शन


संदल जुलूस पर पुलिस की सख्त कार्रवाई से भड़का आक्रोश, देर रात तक हुआ नारेबाजी और हाई वोल्टेज हंगामा

थान खम्हरिया । हजरत निजामुद्दीन औलिया के उर्स के अवसर पर निकाली गई संदल जुलूस के दौरान लगे डीजे वाहनों पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बाद थान खम्हरिया नगर में देर रात तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के चेयरमेन एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज की मौजूदगी में पुलिस ने कोलाहल अधिनियम के तहत तीन डीजे वाहनों को जब्त कर लिया। कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में युवकों ने थाने के सामने प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की।

जानकारी के अनुसार, 2 जून की रात एकता उर्स पाक कमेटी के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय उर्स कार्यक्रम के दौरान चादरपोशी एवं संदल जुलूस निकाला जा रहा था। जुलूस में धूमाल दलों के साथ डीजे साउंड लगे वाहन शामिल थे। इसी दौरान रात करीब 12 बजे डॉ. सलीम राज थान खम्हरिया पहुंचे और पुलिस अधिकारियों के साथ कार्रवाई की निगरानी की।

पुलिस ने छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण नियमों एवं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15(1) के तहत तीन वाहनों क्रमांक CG 07 CH 0940, CG 07 CT 3749 और MH 31 FC 8624 को जब्त कर लिया। साथ ही वाहन चालकों जय निषाद (दुर्ग), रामजी ठाकुर (दुर्ग) एवं जितेंद्र बंछारे (नागपुर) के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।

कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरे युवा

डीजे वाहनों की जब्ती के बाद नगर में आक्रोश फैल गया। रात लगभग 2 बजे से 3 बजे के बीच करीब 500 युवक थाने के सामने एकत्रित हो गए और नारेबाजी करने लगे। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। एडिशनल एसपी सहित आसपास के थानों का पुलिस बल भी मौके पर तैनात किया गया।

उधर उर्स कमेटी और पुलिस अधिकारियों के बीच देर रात दो दौर की बैठक हुई, लेकिन वक्फ बोर्ड चेयरमेन के सख्त रुख के चलते कोई सहमति नहीं बन सकी। अचानक हुई कार्रवाई के कारण चादरपोशी और संदल कार्यक्रम प्रभावित हुआ, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। हालांकि कव्वाली का कार्यक्रम निर्धारित समय पर जारी रहा।

25 मई को ही जारी हुआ था प्रतिबंध संबंधी पत्र

सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने 25 मई को प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर दरगाहों, उर्सों और मजहबी जलसों में डीजे, नाच-गाना, धूमाल एवं अन्य गैर-शरई गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की थी।

यह पत्र रायपुर स्थित धार्मिक संगठन "जमात रजा-ए-मुस्तफा" की शिकायत के संदर्भ में जारी किया गया था। बोर्ड का कहना है कि ऐसे आयोजन कुरान और हदीस की शिक्षाओं के विपरीत हैं तथा सामाजिक समरसता, भाईचारे और अमन-शांति पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

क्या कहता है कानून?

ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि उत्पन्न करना दंडनीय अपराध है। उल्लंघन की स्थिति में धारा 15(1) के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना एवं कारावास दोनों का प्रावधान है। राज्य सरकारें विशेष अवसरों पर सीमित अवधि के लिए रात 11 बजे तक लाउडस्पीकर उपयोग की अनुमति दे सकती हैं।

वक्फ बोर्ड चेयरमेन का बयान

"डीजे, गाना-बजाना तथा नाचना कुरान और हदीस के खिलाफ है। यह गलत परंपरा समाज को कमजोर कर रही है। हम चाहते हैं कि प्रदेश में सामाजिक समरसता, भाईचारा और अमन-शांति का वातावरण बने। दरगाहों, उर्सों एवं धार्मिक जलसों में डीजे, धूमाल और नाच-गाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।"

डॉ. सलीम राज, चेयरमेन, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड

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