शिकायत के अनुसार, नामांतरण प्रकरण के दौरान कथित रूप से राशि की मांग की गई और किसान खुबन रजक तथा उनके बेटे दयालु रजक को तहसील कार्यालय दाढ़ी से बाहर बेमेतरा जिला मुख्यालय स्थित घर पर बुलाकर बातचीत किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने अपने बचाव तथा मामले को प्रमाणित करने के उद्देश्य से संबंधित बातचीत की वाइस रिकॉर्डिंग और तस्वीरें सुरक्षित रखी हैं।
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर को दिए आवेदन में कहा है कि यदि नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व कार्य के लिए किसान से इस प्रकार राशि की मांग की गई है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
किसान का बयान और रिकॉर्डिंग की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले में संबंधित किसान और अन्य पक्षों के बयान दर्ज किए जाएं तथा उपलब्ध वाइस रिकॉर्डिंग एवं तस्वीरों की जांच कराई जाए, ताकि आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान राशि की मांग किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो नायब तहसीलदार राधाकिशन घृतलहरे के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि क्या भूमि नामांतरण जैसे राजस्व कार्य के लिए वास्तव में किसी किसान से लाखों रुपये की मांग की गई थी? यदि शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य में आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला गंभीर प्रशासनिक एवं राजस्व जांच का विषय बन सकता है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
वर्सन
आरोप निराधार है, ऐसा कुछ भी नहीं है, मेरे द्वारा रूपये की कोई मांग नहीं की गई है !
राधाकिशन घृतलहरे, नायब तहसीलदार तहसील कार्यालय दाढ़ी
मामले पर प्रशासनिक और राजस्व द्वारा निष्पक्ष जांच होने तक, खबर लगातार जारी रहेगी तब तक के लिए बने रहिए बेमेतरा टाइम्स पर.......
