सरकारी अभियान की चमक के बीच आम जनता के काम ठप! दूर-दराज से आए आवेदकों को नहीं मिल रहे जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी
अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यक्रमों में ड्यूटी लगाए जाने के चलते कई कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने और सन्नाटा पसरे रहने की स्थिति सामने आ रही है। अपनी समस्याओं के समाधान और जरूरी शासकीय कार्यों के लिए दूर-दराज से कार्यालय पहुंचने वाले आवेदक संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण परेशान होकर भटक रहे हैं।
कार्यक्रम में अफसर मौजूद, कार्यालय में जनता परेशान
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वे समय और पैसा खर्च कर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी या कर्मचारी उपलब्ध नहीं मिलते। कई आवेदकों के काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और उन्हें दोबारा आने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
एक तरफ मंचों से शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने और जनता की समस्याओं के समाधान की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कार्यालय पहुंचने वाली जनता को ही जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सेवा किसकी और किसके लिए?
एक अभियान के लिए दूसरी सेवाएं क्यों प्रभावित?
सरकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही आम नागरिकों के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यदि अभियान की ड्यूटी के कारण कार्यालयीन कामकाज प्रभावित हो रहा है, तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि जनता को परेशानी न उठानी पड़े।
दूर-दराज से आने वाला कोई आवेदक यदि अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण बिना काम कराए लौटता है, तो उसके लिए यह केवल एक दिन की परेशानी नहीं होती। किराया, समय और मजदूरी का नुकसान अलग से होता है।
‘सेवा संकल्प’ की असली परीक्षा कार्यालयों में
जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाना अभियान की सफलता का एक पहलू है, लेकिन जनता जब अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचे और उसे अधिकारी-कर्मचारी ही उपलब्ध न मिलें, तो सेवा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
अब निगाह जिला प्रशासन पर है कि वह इस समस्या को गंभीरता से लेकर अभियान और नियमित प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन कैसे कायम करता है, ताकि ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनता के लिए सुविधा बने, परेशानी का कारण नहीं।