ग्रामीणों के अनुसार, पशु चिकित्सालय का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। भवन की खराब स्थिति के चलते यहां पदस्थ डॉक्टर आडिल के नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने की शिकायत सामने आई है। इससे दूर-दराज से अपने पशुओं का इलाज कराने पहुंचने वाले किसानों को निराश होकर लौटना पड़ता है।
खपरी नांदघाट में रखी जाती हैं दवाइयां, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
पशुपालकों का आरोप है कि चिकित्सालय में उपलब्ध कराई जाने वाली सभी दवाइयां यहां नहीं रखी जातीं, बल्कि उन्हें खपरी नांदघाट में रखा जाता है। ग्रामीणों ने दवाइयों के रखरखाव और वितरण व्यवस्था की जांच की मांग की है।
कुछ किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पशुओं के उपचार में एक्सपायरी दवाइयों का उपयोग किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो इससे पशुधन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
निशुल्क दवाइयों के लिए भी राशि लेने का आरोप
पशुपालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि शासन द्वारा पशुओं के उपचार के लिए निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली दवाइयों के एवज में भी उनसे राशि वसूली जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर किसानों के लिए यह अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी प्रभावित
क्षेत्र के किसानों के मुताबिक पशुओं की नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए शासन की महत्वपूर्ण कृत्रिम गर्भाधान योजना का लाभ भी पशुपालकों को पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रहा है। सुविधा उपलब्ध नहीं होने से पशुपालन व्यवसाय प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग
क्षेत्र के पशुपालकों और किसानों ने प्रशासन से पशु चिकित्सालय के जर्जर भवन की तत्काल मरम्मत कराने, चिकित्सक की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही निशुल्क दवाइयों के वितरण, दवाइयों की गुणवत्ता और कृत्रिम गर्भाधान व्यवस्था की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी उठाई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पशुपालन उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में पशु चिकित्सालय की व्यवस्थाओं में जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसानों और पशुपालकों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।
