मामले पर थान खमरिया निवासी गोपाल प्रसाद शर्मा ने आवेदन के माध्यम से बताया कि लोक निर्माण विभाग, बेमेतरा संभाग, जिला बेमेतरा में पदस्थ कार्यपालन अभियंता डीके चंदेल एवं संबंधित जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया। यह कि उक्त अधिकारियों द्वारा ज्ञापन क्रमांक 5899 /का. अ./व. ले. पि./2025, दिनांक 07/11/2025 के माध्यम से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर RTI आवेदक अब्दुल वाहिद रवानी वार्ड क्रमांक 21, बाजार पारा, बेमेतरा का नाम एवं पूरा आवासीय पता सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया गया। अपराध की गंभीरता यह कि किसी RTI आवेदक की पहचान एवं पता सार्वजनिक करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं निजता के मौलिक अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन है, RTI अधिनियम की गोपनीयता एवं प्रतिशोध-रोक सिद्धांत के पूर्णतः विपरीत है, जिससे संबंधित RTI आवेदक की जान-माल की सुरक्षा को वास्तविक खतरा उत्पन्न हुआ है तथा उसे मानसिक भय, दबाव एवं असुरक्षा की स्थिति में डाला गया है। यह कृत्य लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग, दुर्भावना, एवं नागरिक को भयभीत करने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।
ये है लागू विधिक प्रावधान
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS):
धारा 196 – निजी/व्यक्तिगत जानकारी का अवैध प्रकाशन (गोपनीयता भंग)
धारा 197 – ऐसा कृत्य जिससे भय अथवा सुरक्षा संकट उत्पन्न हो
धारा 201 – ऐसा कार्य जिससे जीवन को खतरा उत्पन्न हो
धारा 316 – लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग
धारा 3(5) – सामूहिक आपराधिक दायित्व (यदि एक से अधिक अधिकारी सम्मिलित हों)
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000:
धारा 72 – गोपनीयता एवं व्यक्तिगत सूचना का उल्लंघन
(अन्य धाराएँ विवेचना के दौरान जोड़ी जा सकती हैं।)
4. विधिक स्थिति
यह कि BNSS/CrPC की धारा 154 के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना प्राप्त होने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य है।
यदि थाना स्तर पर FIR दर्ज नहीं की गई है, तो पुलिस अधीक्षक को हस्तक्षेप कर FIR दर्ज कराने का वैधानिक अधिकार एवं दायित्व है।
