नवागढ़/मुरता । ग्राम मुरता स्थित 2000 टन क्षमता वाले डबल लॉक खाद गोदाम की हालत इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। लगभग 25 वर्ष पूर्व तत्कालीन मंत्री स्व. डीपी घृतलहरे एवं कांग्रेस नेता स्व. डॉ. नीलचरण साहू के प्रयासों से निर्मित यह गोदाम आज रखरखाव के अभाव में अपनी उपयोगिता खोने की कगार पर पहुंच गया है।
जानकारी के अनुसार गोदाम की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। शेड में जगह-जगह बड़े छेद हो जाने से बारिश का पानी सीधे खाद की बोरियों पर गिर रहा है, जिससे यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि नमी के कारण खाद पत्थर जैसी सख्त हो जाती है, जिससे खेतों में उपयोग करने में भारी परेशानी होती है।
गोदाम के सामने बना प्लेटफार्म भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। हल्की बारिश में ही परिसर में कीचड़ फैल जाता है, जिससे ट्रकों की लोडिंग-अनलोडिंग प्रभावित होती है। परिवहन कार्य बाधित होने से किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है, जिसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है।
करीब 2000 टन भंडारण क्षमता वाले इस गोदाम का वर्तमान में भी उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसकी जर्जर स्थिति कभी भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो पूरी संरचना गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है।
ग्रामीणों ने बताया कि यह गोदाम क्षेत्र के किसानों के लिए उर्वरकों का प्रमुख केंद्र है। यहां से आसपास के कई गांवों में खाद वितरण किया जाता है। साथ ही हम्माली और परिवहन कार्य से अनेक ग्रामीणों को रोजगार भी मिलता है। ऐसे में गोदाम की बदहाली किसानों के साथ-साथ मजदूरों की आजीविका पर भी असर डाल रही है।
ग्रामीणों एवं किसानों ने प्रशासन, सहकारिता विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि खरीफ और रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द मरम्मत कार्य कराया जाए। लोगों ने सबसे पहले शेड की लीकेज बंद कराने और प्लेटफार्म का पीसीसी निर्माण कराने की मांग उठाई है, ताकि खाद का सुरक्षित भंडारण और सुचारु वितरण सुनिश्चित हो सके।
