मामले में शिकायतकर्ता लोकेश कुमार ने 31 अक्टूबर 2025 को पूर्व सरपंच हेमंत साहू एवं तत्कालीन सचिव कुमार घृतलहरे के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत दर्ज कराई थी। लंबे समय तक मामला टालने के बाद 11 मार्च 2026 को जांच अधिकारी उबारन दास चेलक के नेतृत्व में टीम ग्राम मुरता पहुंची। मौके पर जांच की गई, दस्तावेज देखे गए और संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए गए।
हैरानी की बात यह रही कि जनपद पंचायत नवागढ़ ने लिखित जवाब में कहा कि जांच दल गठित है, लेकिन कार्यालय को अब तक जांच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।
अब इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि 11 मार्च को जांच पूरी हो चुकी थी, तो आखिर 60 दिनों तक प्रतिवेदन कहां अटका रहा? क्या जांच रिपोर्ट जानबूझकर दबाई जा रही है? क्या भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका से इनकार किया जा सकता है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच अधिकारी और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता लोकेश कुमार का कहना है कि प्रशासन केवल मामले को घुमाने का काम कर रहा है। एक ओर अधिकारी RTI लगाने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यालय कहता है कि रिपोर्ट ही प्राप्त नहीं हुई।
इस विरोधाभासी स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायतों में भ्रष्टाचार की जांच केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है, जबकि दोषियों पर कार्रवाई के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

