शिकायत में जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि माननीय व्यवहार न्यायालय द्वारा 24 सितंबर 2025 को पारित डिक्री में खसरा नंबर 790/1 वर्तमान 790/3 एवं 857/1 से संबंधित अधिकारों को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष दिया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उक्त डिक्री में शिवकुमार पिता रतिराम के पूर्व में भी कोई सत्व/स्वत्व अधिकार नहीं होने तथा वर्तमान में भी अधिकार नहीं होने का उल्लेख है।
हाईकोर्ट के आदेश का गलत हवाला देने का आरोप
शिकायतकर्ता ने नवागढ़ तहसीलदार के समक्ष चल रहे प्रकरण क्रमांक 202601230800001/अ-27 में कार्यवाही को कथित रूप से स्थगित रखे जाने पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि नवागढ़ तहसीलदार द्वारा उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए प्रकरण को आगामी आदेश तक स्थगित रखा गया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संबंधित हाईकोर्ट आदेश में ऐसा कोई स्थगन आदेश नहीं है। शिकायत में इस संबंध में आदेश की प्रमाणित जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
2011 और 2019 की दुरुस्ती पर भी उठाए सवाल
शिकायत में राजस्व अभिलेखों में हुई दो दुरुस्तियों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार रिट प्रकरण में 6 जनवरी 2011 को सभी पक्षों को सुनने के निर्देश के बाद भी 4 अप्रैल 2011 को कथित रूप से बिना नोटिस एकपक्षीय आदेश पारित किया गया। इसके बाद संयुक्त खाते की भूमि को सुधिया बाई के नाम दुरुस्त किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इसी तरह 31 जनवरी 2019 को अभिलेखों में शिवकुमार पिता रतिराम के नाम दुरुस्ती किए जाने पर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए इसे कथित कूटरचना बताया है। उन्होंने दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने की मांग की है।
कूटरचित अभिलेख के आधार पर लोन लेने का भी आरोप
शिकायत में सेवा सहकारी समिति नेवसा पंजीयन क्रमांक 400 से शिवकुमार को दिए गए ऋण का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित रूप से गलत/कूटरचित अभिलेखों के आधार पर ऋण लिया गया और अब उसकी रिकवरी संबंधित भूमि से प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की है कि ऋण की वसूली शिवकुमार से की जाए तथा खसरा नंबर 790/3 एवं 857/1 की भूमि को उक्त ऋण से मुक्त किया जाए।
कलेक्टर से चार प्रमुख मांगें
जितेन्द्र सिंह ने कलेक्टर से मांग की है कि कथित बिना स्थगन का परीक्षण कर डिक्री के अनुरूप राजस्व अभिलेखों में कार्रवाई की जाए, वर्ष 2011 और 2019 की दुरुस्तियों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध FIR की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा कथित अवैधानिक ऋण की रिकवरी संबंधित ऋणी से कराकर शिकायतकर्ता की भूमि को ऋण से मुक्त किया जाए।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ न्यायालय की डिक्री, तहसीलदार की कार्यवाही संबंधी दस्तावेज, हाईकोर्ट की आदेश-पत्रिका तथा वर्तमान B-1 एवं P-2 की प्रतियां संलग्न की हैं। अब मामले में जिला प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी।
