इस कार्रवाई से पहले प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने CMHO के खिलाफ शासन-प्रशासन को शिकायत ज्ञापन सौंपकर उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की थी। संघ ने आरोप लगाया था कि CHO संवर्ग को मानसिक, प्रशासनिक एवं आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। महिला कर्मचारियों के साथ कथित अनुचित व्यवहार के आरोपों को लेकर भी संघ ने जांच और कार्रवाई की मांग उठाई थी।
विधायक और मंत्री तक पहुंचा था मामला
मामले को लेकर CHO संघ का प्रतिनिधिमंडल नवागढ़ विधायक एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल तथा साजा विधायक ईश्वर साहू से भी मिला था। संघ ने दोनों जनप्रतिनिधियों के समक्ष पूरा मामला रखते हुए CMHO को पद से हटाने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। संघ को मामले में आवश्यक हस्तक्षेप का आश्वासन मिला था।
इसके बाद संघ ने चेतावनी दी थी कि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो 18 अगस्त को जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
18 अगस्त को बेमेतरा में जुटे थे प्रदेशभर के CHO
संघ की चेतावनी के बाद 18 अगस्त को बेमेतरा में बड़ा आंदोलन हुआ, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे थे। आंदोलन के दौरान CMHO को हटाने, शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी।
हालांकि उस समय CMHO डॉ. रोहलेडर ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया था। उनका कहना था कि CHO कर्मचारियों के गलत तरीके से इंसेंटिव आहरण और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अपेक्षित क्रियान्वयन नहीं करने संबंधी शिकायतों की जांच चल रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि इसी कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए उनके खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप झूठे साबित होने पर मानहानि की कार्रवाई की बात भी कही थी।
CMHO के समर्थन में भी सामने आया था महिला स्टाफ
दूसरी ओर, CMHO के समर्थन में जिला समन्वयक मितानिन सहित बड़ी संख्या में मितानिनें एवं स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारी कलेक्टर से मिलने पहुंची थीं। उन्होंने CMHO पर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए कहा था कि बैठकों में उनके साथ कभी अनुचित व्यवहार नहीं हुआ और वे CMHO को पिता समान मानती हैं।
जांच में आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट
अब राज्य शासन की कार्रवाई के अनुसार शिकायत की जांच के दौरान संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए। जांच प्रतिवेदन में डॉ. रोहलेडर के विरुद्ध अनुचित भाषा के प्रयोग और अनुचित स्पर्श से संबंधित आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए हैं। जांच अधिकारी ने उनके विरुद्ध विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी।
इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित किया है।
जगदलपुर संभाग बनाया गया मुख्यालय
निलंबन अवधि में डॉ. रोहलेडर का मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर संभाग-बस्तर निर्धारित किया गया है। वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे तथा निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते के पात्र होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री बोले— पद कोई भी हो, मर्यादा से ऊपर नहीं
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर सेवा के साथ संवेदनशील और मर्यादित आचरण बनाए रखने की जिम्मेदारी है। किसी भी पद पर बैठा व्यक्ति नियमों और मर्यादाओं से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
मंत्री ने विभाग में भयमुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
बेमेतरा में CHO संघ की शिकायत से शुरू हुआ यह मामला जिला प्रशासन से होते हुए जनप्रतिनिधियों और आंदोलन तक पहुंचा और अब शासन की कार्रवाई के साथ एक नए पड़ाव पर पहुंच गया है। 15 सितंबर को हुई निलंबन की कार्रवाई को 18 अगस्त के आंदोलन के बाद मामले में सामने आया बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
