जिसने दूसरों की जान बचाई, आज उस स्नेक रेस्क्यूर के परिवार को हमारी जरूरत : पत्नी और तीन बेटियों के सिर से उठा सहारा, साहू समाज ने की मदद की शुरुआत



बेमेतरा टाइम्स
। कभी किसी घर में जहरीला सांप निकलने की सूचना मिलती, कभी स्कूल या सरकारी भवन में सर्प होने की खबर आती—तो लोगों की चिंता दूर करने के लिए सबसे पहले पहुंचने वाले सेवाभावी युवा मनीष पाटिल अब इस दुनिया में नहीं हैं। वर्षों तक अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जिंदगी बचाने वाले मनीष की 12 सितंबर को सांप पकड़ने के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद बिलासपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। उनके निधन से परिवार ही नहीं, बल्कि उन्हें जानने वाला पूरा क्षेत्र शोक में डूबा है।

मनीष लंबे समय से स्नेक कैचर के रूप में निस्वार्थ सेवा कर रहे थे। जहरीले और खतरनाक सांपों को पकड़कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ना उनका जुनून बन चुका था। अपनी जान की परवाह किए बिना वे लोगों की मदद के लिए तत्काल पहुंच जाते थे। वर्षों की इस सेवा के दौरान उन्होंने हजारों सांपों को पकड़कर लोगों को संभावित खतरे से बचाया।

दूसरों के लिए संकटमोचक, लेकिन अपने परिवार के लिए छिन गया सहारा

मनीष ने जिंदगी भर दूसरों के संकट को दूर करने का काम किया, लेकिन उनके जाने के बाद उनका अपना परिवार मुश्किल दौर में आ गया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में अब उनकी पत्नी और तीन बेटियां हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने वाला मुख्य सहारा अचानक छिन जाने से पत्नी के सामने बेटियों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है।

यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक मानवीय सवाल भी है—जिस व्यक्ति ने जरूरत के समय दूसरों की जिंदगी बचाने में कभी पीछे कदम नहीं खींचे, क्या उसके परिवार को संकट की इस घड़ी में हम अकेला छोड़ सकते हैं?

साहू समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ

मनीष के निधन की खबर के बाद युवा प्रकोष्ठ तहसील साहू संघ नवागढ़ ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आर्थिक सहयोग का निर्णय लिया। युवा प्रकोष्ठ तहसील साहू संघ के अध्यक्ष विजय साहू ने बताया कि समाज के सदस्यों और साथियों के सहयोग से 15,551 रुपए की आर्थिक सहायता एकत्रित कर परिवार को प्रदान की गई।

विजय साहू ने कहा कि मनीष ने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली। ऐसे सेवाभावी व्यक्ति के परिवार के साथ खड़ा होना केवल सहायता नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सहयोग करने वाले सभी साथियों के प्रति तहसील की ओर से आभार व्यक्त किया।

छोटी मदद, लेकिन परिवार के लिए बड़ी ताकत

आपको बता दे कि मनीष ने अपनी जिंदगी दूसरों को सुरक्षित रखने में लगा दी। आज उनके परिवार को हमारी जरूरत है। किसी की मदद के लिए दिया गया छोटा-सा सहयोग भी इस कठिन समय में परिवार के लिए बड़ी ताकत बन सकता है।

मनीष पाटिल आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए उनका साहस, सेवा और समर्पण हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार के लिए आगे बढ़ाया गया हर मदद का हाथ न केवल एक जरूरतमंद परिवार को सहारा देगा, बल्कि एक ऐसे इंसान को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी, जिसने अपनी जिंदगी दूसरों की सुरक्षा के नाम कर दी।


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