संघ का कहना है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी स्कूल सफाई कर्मचारियों को प्रधान पाठक एवं प्राचार्य के निर्देश पर विभिन्न शालेय कार्यों में बुलाया जाता है। स्कूल परिसर में पेड़-पौधों की देखरेख एवं पानी देने, बच्चों की गणवेश, कपड़े और पुस्तकों से संबंधित कार्यों के लिए बुलाने तथा समर कैंप के दौरान उपस्थिति देने जैसे कार्य कर्मचारियों द्वारा किए जाते हैं।
संघ ने आरोप लगाया कि स्कूल सफाई कर्मचारियों के ग्रीष्मावकाश के दौरान कार्य चालू रहेगा या बंद, इस संबंध में जिला स्तर से स्पष्ट आदेश नहीं होने के कारण कर्मचारियों की स्थिति असमंजसपूर्ण बनी हुई है। वहीं, उन्हें शासकीय कर्मचारी मानकर मनरेगा अथवा ग्राम पंचायत के अन्य कार्यों से भी वंचित कर दिया जाता है। इससे कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की बात संघ ने कही है।
“काम लिया तो मानदेय भी दें”
कर्मचारियों ने प्रशासन के समक्ष सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ग्रीष्मावकाश में भी विभागीय निर्देश पर उनसे शालेय कार्य कराया जाता है, तो मई-जून 2026 का मानदेय क्यों रोका जाए? संघ ने मांग की है कि ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय तत्काल जारी कर कर्मचारियों को भुगतान किया जाए।
दुर्ग और बालोद का दिया उदाहरण
ज्ञापन में संघ ने दावा किया है कि दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक तथा बालोद जिले के बालोद ब्लॉक में स्कूल सफाई कर्मचारियों को ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय दिया जा रहा है। इसके समर्थन में संबंधित दस्तावेजों की छायाप्रति भी ज्ञापन के साथ संलग्न किए जाने की बात कही गई है।
संघ के बेरला ब्लॉक अध्यक्ष शशिभूषण देवांगन, साजा ब्लॉक अध्यक्ष संतोष पटेल सहित ब्लॉक पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मामले में सकारात्मक कार्रवाई करते हुए मई-जून 2026 का लंबित मानदेय शीघ्र जारी करने की मांग की है।
अब देखना यह है कि ग्रीष्मावकाश में कर्मचारियों से लिए गए कार्य और मानदेय के मुद्दे पर जिला प्रशासन क्या निर्णय लेता है।
