मोर गांव मोर पानी अभियान में प्रशासनिक अव्यवस्था पर बड़ा सवाल, घर से बिना खाए पहुंचीं मितानिन, आंगनबाड़ी और बिहान समूह की महिलाएं
सबसे गंभीर विषय भोजन और नाश्ते की व्यवस्था को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कई महिलाएं सुबह 8-9 बजे ही घर से बिना भोजन किए निकल गई थीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम स्थल पर नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई होगी। लेकिन महिलाओं के अनुसार, लंबे इंतजार के बावजूद उन्हें न तो नाश्ता मिला और न ही भोजन।
नाम नहीं छापने की शर्त पर समूह की कुछ महिलाओं ने बताया कि वे सुबह से भूखी-प्यासी कार्यक्रम स्थल पर बैठी रहीं। करीब 4 बजे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महिलाएं सीधे होटल पहुंचीं और अपनी व्यवस्था से चाय-नाश्ता किया।
कार्यक्रम में टेमरी, नांदघाट, सांबलपुर, बेरला सहित अन्य संकुलों से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि दूर-दराज के क्षेत्रों से महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचेंगी, तो उनके लिए भोजन और नाश्ते की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या महिलाओं को सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए बुलाया गया था?
सुबह से कार्यक्रम स्थल पर बैठी महिलाओं को घंटों इंतजार कराने और कथित तौर पर भोजन-नाश्ता तक उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी कार्यक्रमों में करोड़ों रुपये के अभियान, मंच, प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाता है, लेकिन जिन महिलाओं को योजनाओं और अभियानों का जमीनी चेहरा बनाया जाता है, उन्हीं के लिए एक नाश्ते और भोजन की व्यवस्था नहीं होना आखिर किस तरह की प्रशासनिक संवेदनशीलता है?
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस कथित अव्यवस्था पर संज्ञान लेता है या फिर सुबह से भूखी बैठी महिलाओं की परेशानी भी सरकारी कार्यक्रमों की औपचारिकता के बीच दबकर रह जाएगी।
