10 बजे का कार्यक्रम 1 बजे शुरू, 2 बजे पहुंचे मंत्री! सुबह से भूखी बैठी रहीं महिलाएं, 4 बजे तक नहीं मिला नाश्ता-भोजन

मोर गांव मोर पानी अभियान में प्रशासनिक अव्यवस्था पर बड़ा सवाल, घर से बिना खाए पहुंचीं मितानिन, आंगनबाड़ी और बिहान समूह की महिलाएं


नवागढ़ जिला प्रशासन की ओर से नवागढ़ ब्लॉक के ग्राम जेवरा (एन) में आयोजित ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम में कथित प्रशासनिक अव्यवस्था सामने आई है। कार्यक्रम सुबह 10 बजे निर्धारित था, लेकिन करीब 1 बजे शुरू हुआ, जबकि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल करीब 2 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस बीच सुबह से कार्यक्रम स्थल पर पहुंची सैंकड़ो की संख्या मे मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बिहान समूह की महिलाएं घंटों इंतजार करती रहीं।

सबसे गंभीर विषय भोजन और नाश्ते की व्यवस्था को लेकर सामने आया है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कई महिलाएं सुबह 8-9 बजे ही घर से बिना भोजन किए निकल गई थीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम स्थल पर नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की गई होगी। लेकिन महिलाओं के अनुसार, लंबे इंतजार के बावजूद उन्हें न तो नाश्ता मिला और न ही भोजन।

नाम नहीं छापने की शर्त पर समूह की कुछ महिलाओं ने बताया कि वे सुबह से भूखी-प्यासी कार्यक्रम स्थल पर बैठी रहीं। करीब 4 बजे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महिलाएं सीधे होटल पहुंचीं और अपनी व्यवस्था से चाय-नाश्ता किया।

कार्यक्रम में टेमरी, नांदघाट, सांबलपुर, बेरला सहित अन्य संकुलों से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब प्रशासन को पहले से पता था कि दूर-दराज के क्षेत्रों से महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचेंगी, तो उनके लिए भोजन और नाश्ते की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

क्या महिलाओं को सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए बुलाया गया था?

सुबह से कार्यक्रम स्थल पर बैठी महिलाओं को घंटों इंतजार कराने और कथित तौर पर भोजन-नाश्ता तक उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या सरकारी कार्यक्रमों में महिला हितग्राहियों और मैदानी कार्यकर्ताओं की सुविधा की कोई जिम्मेदारी तय नहीं है? क्या अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि सुबह से बैठी महिलाओं ने भोजन किया है या नहीं? अगर कार्यक्रम सुबह 10 बजे का था, तो वह दोपहर 1 बजे तक क्यों खिंचा? और जब मुख्य अतिथि 2 बजे पहुंचे तो घंटों इंतजार करने वाली महिलाओं के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्था की?

सरकारी कार्यक्रमों में करोड़ों रुपये के अभियान, मंच, प्रचार-प्रसार और व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाता है, लेकिन जिन महिलाओं को योजनाओं और अभियानों का जमीनी चेहरा बनाया जाता है, उन्हीं के लिए एक नाश्ते और भोजन की व्यवस्था नहीं होना आखिर किस तरह की प्रशासनिक संवेदनशीलता है?

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस कथित अव्यवस्था पर संज्ञान लेता है या फिर सुबह से भूखी बैठी महिलाओं की परेशानी भी सरकारी कार्यक्रमों की औपचारिकता के बीच दबकर रह जाएगी।

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