घर घेरने, गाली-गलौज, बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी का आरोप ; सरपंच ने थाना प्रभारी से FIR व पुलिस सुरक्षा की मांग की
सरपंच द्वारा थाना प्रभारी को दिए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 26 अगस्त को गांव में एथेनॉल कंपनी द्वारा पंचायत प्रस्ताव के बिना चबूतरा निर्माण शुरू किया जा रहा था। इस पर उनके पति ईश्वरी साहू ने पंचायत में विधिवत प्रस्ताव पारित होने के बाद निर्माण कार्य किए जाने की बात कही। इसके बाद पंचायत द्वारा 27 अगस्त को निर्माण को लेकर कोई आपत्ति नहीं होने संबंधी प्रस्ताव पारित किए जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है।
“करीब 200 लोग घर को घेरकर खड़े हो गए”
सरपंच का आरोप है कि इसके बाद करीब 200 महिला-पुरुष उनके घर के पास पहुंचे और चारों तरफ से घर को घेर लिया। आवेदन के अनुसार, सरपंच ने भीड़ से हाथ जोड़कर बातचीत के माध्यम से मामला शांत करने और उनकी मांगों पर विचार करने का आग्रह किया, लेकिन कथित रूप से कुछ लोगों ने उनके एवं परिवार के साथ अश्लील गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
सरपंच ने आवेदन में आरोप लगाया है कि गौकरण साहू द्वारा भीड़ को उकसाया गया, जिसके बाद उनके घर में हमला करने जैसी स्थिति निर्मित हुई। स्थिति को गंभीर देखते हुए उनके पति ईश्वरी साहू पीछे के दरवाजे से निकलकर वहां से चले गए। सरपंच ने आशंका जताई है कि यदि वे वहां से नहीं निकलते तो उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती थी।
वीडियो फुटेज को बनाया आधार, आरोपियों की पहचान की मांग
आवेदन में सरपंच ने घटना के वीडियो फुटेज उपलब्ध होने की बात कही है। उन्होंने पुलिस से वीडियो के आधार पर घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। साथ ही घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के रूप में ईश्वरी साहू, जितेन्द्र साहू, बलवा साहू, ओमप्रकाश साहू, बसंत साहू सहित अन्य लोगों का उल्लेख किया गया है।
FIR के साथ पुलिस सुरक्षा की मांग
सरपंच ने थाना प्रभारी से गौकरण साहू सहित घटना में शामिल बताए गए महिला-पुरुषों के विरुद्ध FIR दर्ज कर तत्काल कार्रवाई एवं गिरफ्तारी की मांग की है। इसके साथ ही स्वयं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले ग्राम पंचायत भैंसा के सैकड़ों ग्रामीण सरपंच के खिलाफ कार्रवाई और अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्हें कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार के पास रोक दिया गया था, जिसके बाद जनपद पंचायत सीईओ नवीन मसीयारे ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से ज्ञापन लिया था। अब सरपंच की ओर से भी बड़ी संख्या में लोगों के साथ शिकायत लेकर प्रशासन और पुलिस के समक्ष पहुंचने से भैंसा पंचायत का विवाद आमने-सामने की स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है।
अब पूरे मामले में प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद भैंसा पंचायत का विवाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
