खिलाड़ियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि सुबह नाश्ते में उपमा दिया गया था और बीच मे केला व बिस्किट जैसे स्वलपाहार बांटे जा रहे थे, उसके बाद दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तक कई खिलाड़ी भोजन के इंतजार में रहे। खिलाड़ियों के अनुसार उन्हें बार-बार यह कहकर रोका जाता रहा कि “मुख्य अतिथि बस आधे घंटे में आ रहे हैं।” इंतजार बढ़ता गया और भोजन की व्यवस्था समय पर नहीं हो सकी।
12 बजे का कार्यक्रम, ढाई बजे शुरू हुआ
आयोजन की पूर्व सूचना के अनुसार उद्घाटन समारोह दोपहर 12 बजे निर्धारित था और मुख्य अतिथि के रूप में दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल को आमंत्रित किया गया था। लेकिन कार्यक्रम लगभग ढाई बजे शुरू हुआ। यानी निर्धारित समय से करीब ढाई घंटे बाद आयोजन शुरू होने से व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
कार्यक्रम शुरू होने के समय रिमझिम बारिश हो रही थी। इसके बावजूद खिलाड़ियों एवं छात्र-छात्राओं को मैदान में खड़ा रखा गया। दूसरी ओर मंच पर अतिथियों के उद्बोधन चलते रहे।
भूख और बारिश के बीच मैदान में खड़े रहे खिलाड़ी
खिलाड़ियों का कहना है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने आए खिलाड़ियों के लिए भोजन, विश्राम और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। लेकिन मुख्य अतिथि के इंतजार में कार्यक्रम को लंबे समय तक रोके रखने से खिलाड़ियों एवं छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ी।
इसी दौरान एक छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई। छात्रा किस वजह से बेहोश हुई, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बिना नहीं की जा सकती, लेकिन जिस समय वह बेहोश हुई, उस समय खिलाड़ियों के अनुसार वह लंबे समय से भोजन नहीं कर पाई थी और बारिश में भी मैदान में खड़ी थी।
राज्य स्तरीय आयोजन में ऐसी अव्यवस्था क्यों?
यह सवाल अब उठना लाजिमी है कि जब कार्यक्रम दोपहर 12 बजे निर्धारित था तो खिलाड़ियों एवं छात्र-छात्राओं को घंटों इंतजार क्यों कराया गया? यदि मुख्य अतिथि के पहुंचने में देरी थी तो बच्चों और खिलाड़ियों के लिए भोजन के लिए बैठने की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? बारिश की स्थिति को देखते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर खड़ा करने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? और सबसे बड़ा सवाल—खिलाड़ियों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी थी?
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ी अपने-अपने जिलों का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे हैं। ऐसे में उनके साथ भोजन और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था में लापरवाही की शिकायत सामने आना आयोजन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अतिथियों के स्वागत से ज्यादा जरूरी खिलाड़ियों की सुविधा
बड़े सरकारी आयोजनों में मंच, स्वागत और अतिथियों की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है, लेकिन इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खिलाड़ियों एवं छात्र-छात्राओं की सुविधा और स्वास्थ्य से पहले वीआईपी प्रोटोकॉल को प्राथमिकता दी गई?
स्कूल शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन को पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए यह स्पष्ट करना चाहिए कि खिलाड़ियों को भोजन किस समय उपलब्ध कराया गया, निर्धारित समय से कार्यक्रम में देरी क्यों हुई, बारिश के दौरान बच्चों एवं खिलाड़ियों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था थी तथा बेहोश हुई छात्रा को तत्काल किस प्रकार की चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।
राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिता खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने का मंच है, न कि उन्हें घंटों भूखे और बारिश में खड़े रखने का। अब सवाल व्यवस्था से है—जिम्मेदारी तय होगी या मामला आयोजन की अव्यवस्था बताकर दबा दिया जाएगा?
वर्सन
नाश्ता दिया गया था, वेट के कारण हो सकता है कोई नाश्ता नहीं किया होगा, ऐसा जो भी बोल रहा है गलत है !
अभय जायसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा
किसी को कुछ दिखे या ना दिखे पर हमें जो दिखता है हम वही लिखते हैं............. 🙏
