मुड़पार के बालाजी पावर एंड इस्पात प्लांट पर पर्यावरण मंडल का शिकंजा ! निरीक्षण में मिलीं 7 खामियां, 15 दिन में जवाब तलब !

मुड़पार-रामपुर स्थित प्लांट को कारण बताओ नोटिस; प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति और प्रतिदिन 30 हजार रुपये की कार्रवाई की चेतावनी


बेमेतरा टाइम्स । बेमेतरा जिले के नवागढ़ तहसील अंतर्गत मुड़पार-रामपुर गांव में संचालित मेसर्स बालाजी पावर एंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व नाम—वीएपी इस्पात) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उद्योग से प्रदूषण फैलने की शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय भिलाई ने प्लांट का निरीक्षण किया। निरीक्षण में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था से जुड़ी सात प्रमुख खामियां सामने आने के बाद मंडल ने उद्योग को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31-क के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उद्योग को नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।

निरीक्षण में सामने आईं प्रदूषण नियंत्रण की सात खामियां

जानकारी के अनुसार, समाचार पत्रों में उद्योग से प्रदूषण फैलने संबंधी शिकायतें प्रकाशित होने के बाद 24 अक्टूबर 2026 को पर्यावरण मंडल के अधिकारियों ने प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान स्पंज आयरन उत्पादन इकाई और परिसर की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में कई कमियां दर्ज की गईं।

निरीक्षण में सामने आई प्रमुख खामियां इस प्रकार हैं—

  1. चिमनी से धुएं का उत्सर्जन : 2×350 टीपीडी क्षमता वाले दोनों स्पंज आयरन किल्न की साझा चिमनी से भारी मात्रा में धुआं निकलता पाया गया।
  2. कूलर डिस्चार्ज पॉइंट पर उत्सर्जन : दोनों किल्न के कूलर डिस्चार्ज पॉइंट पर भारी मात्रा में फ्यूजिटिव यानी खुले में धूल एवं उत्सर्जन की स्थिति मिली।
  3. सेपरेशन बिल्डिंग में धूल : किल्न नंबर-2 की प्रोडक्ट सेपरेशन बिल्डिंग से धूल उड़ती पाई गई।
  4. बैग फिल्टर की धूल का जमाव : बैग फिल्टर की धूल कूलर के पास, आई-बीम क्षेत्र और दोनों सेपरेशन बिल्डिंग में जमा मिली।
  5. ऑनलाइन निगरानी प्रणाली में कमी : चिमनी पर स्थापित ओसीईएमएस (ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम) का डेटा अपडेट नहीं मिला।
  6. आंतरिक सड़कों पर धूल : प्लांट की सड़कों पर धूल की मोटी परत मिली। पानी का नियमित छिड़काव नहीं होने से वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ रही थी।
  7. साफ-सफाई की खराब स्थिति : प्लांट परिसर में हाउसकीपिंग और साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं पाई गई।

मंडल के अनुसार, निरीक्षण में मिली इन कमियों को वायु अधिनियम, 1981 की धारा 21 के तहत दी गई सम्मति की शर्तों के उल्लंघन के रूप में देखा गया है।

प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था सुधारने के निर्देश

कारण बताओ नोटिस में उद्योग को प्रदूषण नियंत्रण उपकरण तत्काल दुरुस्त करने, उत्सर्जन को निर्धारित मानकों के भीतर लाने और खुले में धूल एवं प्रदूषकों के उत्सर्जन पर रोक लगाने के निर्देश प्रस्तावित किए गए हैं। इसके अलावा बैग फिल्टर प्रणाली को चालू एवं प्रभावी रखने, जमा धूल को वैज्ञानिक तरीके से हटाने और सुरक्षित रूप से संग्रहित करने, आंतरिक सड़कों की नियमित सफाई तथा पानी का छिड़काव सुनिश्चित करने को कहा गया है।

नोटिस में ठोस कचरे का उचित निपटान करने और प्लांट परिसर की साफ-सफाई एवं रखरखाव में सुधार करने संबंधी निर्देश भी शामिल हैं। साथ ही, उल्लंघनों के लिए उद्योग पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात कही गई है।

15 दिन में जवाब नहीं दिया तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

पर्यावरण मंडल ने उद्योग को नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। नोटिस के अनुसार, निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर प्रस्तावित निर्देशों को बिना किसी अन्य सूचना के अंतिम माना जा सकता है और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 37 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

नोटिस में उल्लंघनों के संबंध में प्रतिदिन 30 हजार रुपये की दर से जुर्माने की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि, यह कार्रवाई नोटिस में निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगी।

अब निगाहें उद्योग के जवाब और पर्यावरण मंडल की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। उद्योग की ओर से इन खामियों पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था में कितना सुधार होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


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