कानून जानो, बचपन बचाओ : बेमेतरा के 7 स्कूलों में न्यायिक पहल, बच्चों को बताए सुरक्षा के 5 बड़े कानून !

बेमेतरा के 7 स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर, पॉक्सो से लेकर बाल विवाह और निःशुल्क शिक्षा के अधिकार तक दी गई जानकारी


बेमेतरा टाइम्स । बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बेमेतरा द्वारा जिले में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देश पर संचालित ‘कानून जानो, बचपन बचाओ’ अभियान के तहत जिले के विभिन्न स्कूलों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी दी गई।

प्रधान जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष श्रीमती सरोज नंद दास के मार्गदर्शन तथा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती स्वर्णलता ओम यादव के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान के अंतर्गत न्यायाधीश श्री शुभम नामदेव, कु. प्रज्ञा वैष्णव एवं कु. ज्योति शर्मा की उपस्थिति में स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम हुए।

सात स्कूलों तक पहुंची विधिक सेवा की टीम

अभियान के तहत रेडियंस पब्लिक स्कूल लोलेसरा, शासकीय हाई स्कूल लोलेसरा, शासकीय मिडिल स्कूल उघरा, हथमुड़ी एवं भीजाभाट तथा शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल जेवरी सहित विभिन्न विद्यालयों में शिविर आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में बच्चों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भयमुक्त बचपन का अधिकार है। साथ ही किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय की स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित माध्यम से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।

बच्चों की सुरक्षा के लिए पांच प्रमुख कानूनों की जानकारी

शिविरों में बच्चों के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े पांच प्रमुख कानूनों पर विशेष जानकारी दी गई।

1. पॉक्सो अधिनियम 2012 : बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले इस कानून के बारे में बताया गया। किसी बच्चे के साथ यौन अपराध होने या इसकी जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के महत्व को समझाया गया।

2. बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम, 1986: बच्चों से प्रतिबंधित कार्यों और खतरनाक व्यवसायों में काम कराने के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

3. बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 : बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों से अवगत कराते हुए बताया गया कि विवाह के लिए न्यूनतम कानूनी आयु लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष है।

4. किशोर न्याय अधिनियम 2015 : देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून का उल्लंघन करने के आरोप में आए बच्चों के लिए निर्धारित विशेष कानूनी व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई।

5. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 : छह से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा के अधिकार को समझाया गया।

मुसीबत में इन नंबरों से मिलेगी मदद

बच्चों को किसी भी संकट की स्थिति में सहायता लेने के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और आपातकालीन सहायता नंबर 112 की जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि जरूरतमंद व्यक्ति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बेमेतरा के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

साजा में भी हुआ जागरूकता कार्यक्रम

गौरतलब है कि इस अखिल भारतीय विद्यालय जागरूकता अभियान का शुभारंभ 10 अक्टूबर को किया गया था। इसके प्रथम चरण में 26 से 31 अक्टूबर तक सघन जागरूकता सप्ताह मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में साजा स्थित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में व्यवहार न्यायाधीश कु. माला यादव की उपस्थिति में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधियों तथा अधिकार मित्रों ने भी भाग लिया।

इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें शोषण, बाल श्रम, बाल विवाह और अन्य अपराधों के प्रति जागरूक बनाना है, ताकि बच्चे अपने अधिकारों को समझें और आवश्यकता पड़ने पर समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।

 


Post a Comment

Previous Post Next Post