आवेदन में ईंट भट्ठा संचालकों ने बताया कि वे पारंपरिक रूप से कुम्हार समाज से जुड़े हैं और पीढ़ियों से ईंट निर्माण, खपरा तथा मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि ईंट निर्माण और विक्रय ही उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है।
संचालकों के अनुसार, इस वर्ष ग्राम पंचायत, तहसील प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के बाद कई ईंट भट्ठों की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा दी गई है। उनका आरोप है कि वर्तमान में तहसीलदार और पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा ईंटों के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया, जिसके कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
ईंट भट्ठा संचालकों ने बताया कि बरसात का मौसम नजदीक होने के कारण यदि तैयार ईंटों का विक्रय नहीं हो पाया तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनके पास रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं है और वर्तमान स्थिति में परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।
जनदर्शन में सौंपे गए आवेदन में संचालकों ने कलेक्टर से मांग की है कि जब्त ईंटों को बेचने की अनुमति प्रदान की जाए तथा उन पर लगाए गए अर्थदंड को माफ किया जाए, ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
ईंट भट्ठा संचालकों की इस सामूहिक मांग ने जिले में आजीविका, पारंपरिक व्यवसाय और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हुई हैं।
