गौरतलब है कि ग्राम सिंघनपुरी निवासी नीलेश बंजारे की शिकायत पर सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी विनय कुर्रे के विरुद्ध रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामले से संबंधित बयान और अन्य तथ्यों के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल जांच समिति गठित कर जांच शुरू कराई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि निर्धारित अवधि में जांच पूरी कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन एक सप्ताह की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन लंबित रहने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। आमजन और सामाजिक संगठनों के बीच चर्चा है कि आखिर जांच रिपोर्ट में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या जांच प्रक्रिया किसी दबाव में है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई ही प्रशासन की विश्वसनीयता को बनाए रख सकती है। वहीं आरोपी कर्मचारी अब भी अपने पद पर बना हुआ है, जिससे निष्पक्ष जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि समय-सीमा के भीतर जांच पूरी नहीं हो सकी तो प्रशासन को इसकी वजह सार्वजनिक करनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जांच रिपोर्ट कब तक प्रस्तुत की जाएगी और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई होगी।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। जनता जवाब चाहती है कि आखिर जांच समिति की रिपोर्ट कहां अटकी है और रिश्वतकांड के आरोपों पर अंतिम कार्रवाई कब होगी। पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर खड़े इस मामले में प्रशासन की अगली पहल ही तय करेगी कि जनता का भरोसा मजबूत होगा या संदेह और गहरा जाएगा।
इस संबंध में जानकारी लेने बेमेतरा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई को कई बार फोन लगाया गया लेकिन उनका नंबर हर बार व्यस्त आया !
जांच अभी चल रहा है, प्रोसेस मे है ! रिपोर्ट वगैरह अभी सबमिट नहीं किए हैं, बाकि सोमवार मंगलवार तक एक बार कांटेक्ट करियेगा !
सुशील सिंह, लीड बैंक अधिकारी, जांच टीम सदस्य
