कलेक्टर कार्यालय की खाद्य शाखा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि राशन वितरण शासन के निर्देशानुसार थम्ब (अंगूठा) आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से किया जाना अनिवार्य है। OTP के माध्यम से वितरण केवल विशेष परिस्थितियों, जैसे अंगूठे का फेड होना या तकनीकी बाधा आने पर ही किया जा सकता है।
जारी निर्देश में कहा गया है कि जिले में OTP के माध्यम से अत्यधिक वितरण न केवल शासन के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सघन जांच के आदेश, दुकानों का होगा निरीक्षण
खाद्य अधिकारी ने जिले के सभी सहायक खाद्य अधिकारियों एवं खाद्य निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की उचित मूल्य दुकानों का सघन निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि राशन का वितरण शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से हो।
बिना कारण OTP वितरण पर होगी कार्रवाई
आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी उचित मूल्य दुकान में बिना उचित एवं सत्यापित कारण के OTP के माध्यम से राशन वितरण पाया जाता है, तो संबंधित विक्रेता एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी क्षेत्रीय अधिकारियों की होगी।
मांगा गया विस्तृत प्रतिवेदन
जिला प्रशासन ने जिले में OTP आधारित अत्यधिक राशन वितरण के कारणों की बिंदुवार जांच कर प्रमाण सहित विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि शासन को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।
अब उठ रहे बड़े सवाल
क्या जिले में बायोमेट्रिक मशीनें सही ढंग से काम नहीं कर रही थीं?
क्या हितग्राहियों की जानकारी के बिना OTP आधारित वितरण किया गया?
क्या राशन वितरण में गड़बड़ी छिपाने के लिए OTP का सहारा लिया गया?
आखिर बेमेतरा ही पूरे प्रदेश में OTP वितरण में नंबर-1 क्यों बना?
जिले में जारी इस आदेश के बाद उचित मूल्य दुकानों, खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
