चंद दिनों में बिखर गई सड़क, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
पुलिस कर्मियों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई गई इस सड़क से लोगों को बेहतर आवागमन की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क की परतें उखड़ने लगीं। वर्तमान स्थिति में सड़क पर डामर लगभग गायब हो चुका है और केवल गिट्टियां दिखाई दे रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो निर्माण कार्य में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई हो।
पार्षद ने कलेक्टर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्षद रीता पाण्डेय ने कलेक्टर को औपचारिक शिकायत सौंपकर सड़क निर्माण की संपूर्ण जांच कराने की मांग की है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को भी शिकायत की प्रतिलिपि भेजी है, जिसकी आधिकारिक पावती प्राप्त हो चुकी है। शिकायत में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री तथा कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
जनता के पैसे की बर्बादी बर्दाश्त नहीं
पार्षद रीता पाण्डेय ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाले विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य को स्वीकृति देने वाले इंजीनियरों, निरीक्षण करने वाले अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाए तथा दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कठोर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
कलेक्ट्रेट में हलचल, दस्तावेज तलब होने की संभावना
पार्षद की शिकायत के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेज, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और भुगतान संबंधी अभिलेख तलब किए जा सकते हैं। यदि जांच में अनियमितता साबित होती है तो यह मामला जिले के सबसे चर्चित निर्माण घोटालों में शामिल हो सकता है।
जनता का सवाल
जब नई सड़क कुछ महीनों में ही जवाब दे गई, तो आखिर गुणवत्ता प्रमाणित करने वाले जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं और जनता के पैसों का हिसाब कौन देगा?
