ज़हरीले गुपचुप का कहर ! 21 मासूम बीमार, मची रही अफरा-तफरी - सरगांव अस्पताल में चला देर रात तक इलाज, गांव में स्वास्थ्य विभाग का रहा डेरा


बेमेतरा टाइम्स ।
नवागढ़ क्षेत्र के मारो के निकट ग्राम भिलोनी में साप्ताहिक बाजार में गुपचुप खाने के बाद 21 बच्चे अचानक उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए। बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सभी को पड़ोसी जिला मुंगेली के सरगांव अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। राहत की बात यह रही कि सभी बच्चों की हालत अब सामान्य बताई जा रही है और अधिकांश बच्चे उपचार के बाद अपने घर लौट चुके हैं।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया और ग्राम भिलोनी में विशेष निगरानी एवं उपचार शिविर लगाया गया। स्वास्थ्य अमला रातभर गांव में मौजूद रहा तथा प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों की लगातार निगरानी करता रहा।

ये बच्चे हुए थे प्रभावित

नीलम, तन्नू, अंजली, अतुल्य, अंशिका, रौशनी, समीर, चित्रांशी, रेणुका, नोहर, चित्ररेखा, शिवरानी, सोमेश, नूतन, भाविका, आन्या, मांशी, मानवी, डेविड और विनायक सहित कुल 21 बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। वर्तमान में सभी बच्चे स्वस्थ बताए जा रहे हैं।

मारो अस्पताल की बदहाल तस्वीर उजागर, एक भी डॉक्टर नहीं

इस घटना ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मारो की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में एक भी नियमित डॉक्टर पदस्थ नहीं है, जिसके कारण आपात स्थिति में मरीजों को दूसरे जिले के अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। विभाग द्वारा प्रभारी चिकित्सक की व्यवस्था तो की गई है, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल स्वयं बदहाल स्थिति में है।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर

खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. एम. रजा ने बताया कि बुधवार को स्थानीय बाजार में गुपचुप खाने के बाद 21 बच्चे प्रभावित हुए थे। सभी बच्चों का समय पर उपचार किया गया और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम भिलोनी में सर्वे कर स्थिति का जायजा लिया है तथा वर्तमान में कोई नया प्रभावित मरीज नहीं मिला है।

डॉ. रजा ने कहा कि गांव में रातभर स्वास्थ्य विभाग का अमला तैनात रहा ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जा सके। विभाग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

सवाल बरकरार

एक तरफ बच्चों के स्वस्थ होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, वहीं दूसरी ओर यह घटना खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन गुपचुप विक्रेता की जांच और मारो अस्पताल में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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