बेमेतरा टाइम्स | जिले में भूजल संरक्षण और पेयजल सुरक्षा को लेकर पहले सख्ती बरतने के बाद अब जिला प्रशासन ने राहत भरा निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने मानसून के सक्रिय होने, पर्याप्त वर्षा तथा जल स्रोतों में सुधार को देखते हुए 15 जुलाई 2026 से पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत लागू प्रतिबंधों को शिथिल कर दिया है। इसके साथ ही अब जिले में नए बोरवेल (नलकूप) खनन पर लगी रोक भी समाप्त हो गई है।
दरअसल, मानसून के आगमन में देरी और संभावित जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूर्व में 23 जून 2026 को आदेश जारी कर 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 अथवा भूजल स्थिति की पुनर्समीक्षा तक जिले में नए नलकूप (बोरवेल) खनन पर प्रतिबंध लागू किया था। इससे पहले 31 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत भी जिले को जलाभावग्रस्त घोषित कर 1 जनवरी से 30 जून 2026 अथवा मानसून आगमन तक बोर खनन पर रोक लगाई गई थी। उस समय प्रशासन का उद्देश्य भूजल स्तर का संरक्षण तथा आम नागरिकों के लिए पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना था।
अब जिले में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने और 1 जून से अब तक लगभग 183 मिमी वर्षा दर्ज होने के बाद हालात में उल्लेखनीय सुधार आया है। शिवनाथ नदी के एनीकटों सहित अन्य जल संरचनाओं में पर्याप्त जलभराव हो चुका है तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पेयजल संकट की कोई गंभीर शिकायत भी प्राप्त नहीं हुई है। किसानों द्वारा खरीफ फसलों की बुवाई और कृषि कार्य भी सुचारू रूप से किए जा रहे हैं।
इन परिस्थितियों की समीक्षा के बाद कलेक्टर ने 15 जुलाई 2026 से पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को शिथिल करने का आदेश जारी किया है, जिससे बोरवेल खनन पर लगी रोक समाप्त हो गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
हालांकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंध हटने के बावजूद नागरिकों, किसानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं संस्थाओं को जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहिए। वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, भूजल संरक्षण तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों का मितव्ययिता के साथ उपयोग करने की अपील भी की गई है। प्रशासन ने कहा है कि जल संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी है और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
