PM आवास में बड़ी गड़बड़ी : 1.20 लाख क्षतिपूर्ति के कलेक्टर अनुमोदित आदेश पर भी नहीं हुआ अमल, अब 2026 की सूची में नाम जोड़कर मामला दबाने की कोशिश ?


बेमेतरा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में प्रशासनिक लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत हेमाबंध की श्रीमती सुनीता पति जितेन्द्र कोशले का नाम पात्र होने के बावजूद त्रुटिवश आवास प्लस सूची से हटा दिया गया था, जिससे वे योजना के लाभ से वंचित हो गईं। मामले की जांच के बाद जिला पंचायत बेमेतरा ने संबंधित अधिकारियों की गलती स्वीकार करते हुए स्वयं के वेतन/आय से 1.20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का आदेश जारी किया, लेकिन लंबे समय बाद भी इस आदेश का पालन नहीं किया गया।

कार्यालय जिला पंचायत बेमेतरा द्वारा जारी ज्ञापन क्रमांक 3050/जि.पं./PMAY-G/2025-26 दिनांक 18 जुलाई 2025 में स्पष्ट उल्लेख है कि ग्राम पंचायत हेमाबंध में समान नाम की दो हितग्राहियों के कारण जनपद स्तर पर हुई त्रुटि से सुनीता पति जितेन्द्र कोशले का नाम आवास सॉफ्ट से विलोपित हो गया। प्रतिवेदन में यह भी स्वीकार किया गया कि हितग्राही पूरी तरह पात्र थीं और यह गलती जनपद स्तर पर हुई।

जिला पंचायत ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए कि चूंकि आवास सॉफ्ट से नाम हटने के बाद उसे वापस जोड़ने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत बेमेतरा एवं विकासखंड समन्वयक (PMAY-G) अपनी स्वयं की आय से 1 लाख 20 हजार रुपये निर्माण की प्रगति के अनुसार किश्तों में हितग्राही को भुगतान करें। इस आदेश को कलेक्टर द्वारा भी अनुमोदित किया गया था।

अब नया मोड़ : क्षतिपूर्ति नहीं, 2026 की सूची में जोड़ दिया नाम

जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत के स्पष्ट आदेश का पालन करते हुए क्षतिपूर्ति राशि देने के बजाय संबंधित अधिकारियों ने वर्ष 2026 की प्रधानमंत्री आवास योजना की नई सूची में हितग्राही का नाम शामिल कर दिया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पहले से हुए नुकसान और कलेक्टर अनुमोदित क्षतिपूर्ति आदेश को केवल नई सूची में नाम जोड़कर समाप्त किया जा सकता है?

आदेश में स्पष्ट रूप से 1.20 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश है, यह जांच का विषय है कि क्या संबंधित अधिकारियों ने आदेश की वास्तविक भावना और निर्देशों का पालन किया है या नहीं। केवल नई सूची में नाम जोड़ देना क्या उस आदेश का पालन माना जाएगा ? साथ ही, नई सूची में शामिल होने पर हितग्राही को फिर से पूरी प्रक्रिया और स्वीकृति का इंतजार करना पड़ेगा, जबकि पहले हुई प्रशासनिक गलती से हुए नुकसान की भरपाई का आदेश अलग से जारी किया गया था।

आवेदिका आज भी न्याय की उम्मीद में लगातार जनपद पंचायत और जिला पंचायत के चक्कर काट रही हैं। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और कलेक्टर अनुमोदित आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मामले पर पक्ष रखने जनपद पंचायत बेमेतरा सीईओ को कॉल किया गया किंतु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया, ऑफिस जाकर भी मुलाकात करने की कोशिश की गई पर वे ऑफिस में नहीं मिले इसके बाद उन्हें मैसेज के माध्यम से भी संपर्क किया गया किंतु उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं दिया !

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