ज्ञापन में कहा गया कि संघ द्वारा 10 जून 2026 को भी प्रदेशभर के तहसील एवं जिला मुख्यालयों में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारी संगठनों ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान "मोदी की गारंटी" के तहत कर्मचारियों से किए गए वादों को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से मांग की गई कि राज्य के लगभग 4.50 लाख अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार की तर्ज पर 1 जनवरी 2026 से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (डीए) एवं महंगाई राहत (डीआर) दिया जाए तथा डीए एरियर्स की राशि जीपीएफ खाते में समायोजित की जाए।
इसके अलावा कर्मचारियों के लिए घोषित कैशलेस चिकित्सा सुविधा के नियम तत्काल जारी करने, सेवानिवृत्ति पर 240 दिनों के स्थान पर 300 दिनों का अवकाश नगदीकरण, संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण तथा सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
ज्ञापन में शिक्षक एलबी संवर्ग को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना का लाभ देने तथा अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर सभी पात्र पदों पर नियुक्ति देने की भी मांग की गई।
कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से कर्मचारी हित में सभी लंबित मांगों का शीघ्र निराकरण करने का आग्रह करते हुए कहा कि चुनावी घोषणाओं के अनुरूप कर्मचारियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
ज्ञापन पर छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, स्वास्थ्य संयोजक संघ, आईटीआई कर्मचारी अधिकारी संघ, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ, राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ, निःशक्त कर्मचारी अधिकारी संघ, कर्मचारी अधिकारी पेंशनर एसोसिएशन सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के जिला पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।
