गिधवा-परसदा पक्षी अभयारण्य पर भी मंडराया संकट, तीन माह बाद साजा रेंजर के सेवानिवृत्त होते ही और गहराएगा प्रशासनिक शून्य
फिलहाल दुर्ग उप वनमंडल के एसडीओ जितेंद्र कुमार साहू को बेमेतरा एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि दुर्ग उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वॉड) प्रभारी राम पटेल बेमेतरा रेंजर का अतिरिक्त दायित्व संभाल रहे हैं। लेकिन दुर्ग और बेमेतरा के बीच करीब 75 किलोमीटर तथा दोनों क्षेत्रों की अंतिम सीमाओं के बीच लगभग 150 किलोमीटर की दूरी होने से अधिकारियों के लिए दोनों स्थानों की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाना बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थिति आने वाले समय में और गंभीर होने वाली है। अगले तीन महीनों के भीतर साजा वन परिक्षेत्र के रेंजर पी.आर. लसेल भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में बेमेतरा जिले के दोनों प्रमुख वन परिक्षेत्र स्थायी अधिकारियों से वंचित हो जाएंगे, जिससे विभागीय कार्यों के साथ वन संरक्षण गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
गौरतलब है कि भौगोलिक दृष्टि से दुर्ग और बेमेतरा जिले प्रदेश के सबसे कम वन क्षेत्र वाले जिलों में शामिल हैं। इसके बावजूद बेमेतरा जिले में प्रदेश का एकमात्र गिधवा-परसदा पक्षी अभयारण्य स्थित है, जो जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थायी मैदानी नेतृत्व का अभाव संरक्षण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
वन विभाग में लंबे समय से बनी यह प्रशासनिक शून्यता न केवल विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और प्रदेश के एकमात्र पक्षी अभयारण्य की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं खड़ी कर रही है।
वर्सन
रेंजर राम पटेल को बेमेतरा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया वह अभी वहीं रह रहे हैं ! हम अपने स्तर से शासन को पत्र लिख चुके हैं, रिक्त पदों पर नई नियुक्ति एवं तबादलों की प्रक्रिया शासन स्तर पर लंबित है।
दीपेश कपिल, डीएफओ दुर्ग (छत्तीसगढ़)
