समझौते के तहत 20 लाख रुपये का चेक तथा 51 हजार रुपये नगद मृतक के परिजनों को प्रदान किए गए। मुआवजा राशि पर सहमति बनने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मृतक मोहन दास बंजारे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
20 फीट गहरे गड्ढे में काम करते समय दीवार बनी काल
गौरतलब है कि गुरुवार को लोहिया पेपर मिल में काम के दौरान साजा निवासी मजदूर मोहन दास बंजारे की दर्दनाक मौत हो गई थी। बताया गया कि मजदूर करीब 20 फीट गहरे गड्ढे में उतरकर काम कर रहा था। इसी दौरान गड्ढे से सटी कंक्रीट की दीवार अचानक भरभराकर उसके ऊपर गिर गई और मजदूर मलबे में दब गया। हादसे में उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद मिल प्रबंधन पर मृतक के परिजनों को तत्काल सूचना नहीं देने का आरोप भी लगाया गया। परिजनों का कहना था कि उन्हें घटना की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से मिली।
मामला सामने आते ही अस्पताल में डटी रही छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना
मजदूर की मौत की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ता सूर्या सिंह चौहान के नेतृत्व मे अस्पताल पहुंच गए और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा तथा न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। कार्यकर्ता करीब 24 घंटे तक अस्पताल परिसर के सामने डटे रहे।
आंदोलन के दौरान मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही मिल प्रबंधन को मौके पर बुलाकर परिवार के साथ उचित समझौता कराने की मांग की जाती रही।
भारी पुलिस बल और राजस्व अमला रहा तैनात
लगातार चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रहे और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कायम रखी गई।
सहमति के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए रवाना
करीब 24 घंटे के आंदोलन के बाद आखिरकार 20 लाख 51 हजार रुपये के मुआवजे पर सहमति बनी। इसमें 20 लाख रुपये का चेक और 51 हजार रुपये नगद मृतक के परिजनों को सौंपे गए। मुआवजा राशि पर सहमति बनने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
हादसे के बाद शुरू हुआ आंदोलन मुआवजे की सहमति के साथ समाप्त हो गया, लेकिन घटना में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं।
