प्रशिक्षण में जिला जेल के 24 बंदियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों को कैंडल निर्माण की विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल के माध्यम से बंदियों को ऐसा कौशल प्रदान करने का प्रयास किया गया, जिसका उपयोग वे जेल से बाहर आने के बाद आजीविका का साधन विकसित करने में कर सकें।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जेल अधीक्षक राहुल पाण्डेय की सक्रिय पहल एवं मार्गदर्शन तथा कलेक्टर श्रीमती प्रतिष्ठा ममगई के विशेष सहयोग और प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला प्रशासन एवं जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के कौशल विकास, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सजा नहीं, सुधार और पुनर्वास की सोच
यह प्रशिक्षण केवल कैंडल बनाने का हुनर सिखाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बंदियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों को यह अवसर मिल रहा है कि वे अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानें और भविष्य में सम्मानजनक आजीविका की ओर कदम बढ़ाएं।
जिला जेल बेमेतरा की यह पहल “सजा के साथ सुधार और सुधार के साथ पुनर्वास” की अवधारणा को मजबूत करती है। ऐसे प्रयास बंदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौटने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
