संघ द्वारा प्रस्तुत शिकायत में महिला कर्मचारियों के साथ कथित अनुचित एवं गरिमा-विरोधी व्यवहार के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार समीक्षा एवं सामूहिक बैठकों के दौरान कुछ महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया जिससे वे स्वयं को असहज एवं अपमानित महसूस करती हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कथित रूप से महिला कर्मचारियों के कपड़े पकड़कर अपनी ओर खींचना, लेज़र लाइट से उनके शरीर, विशेषकर क्षेत्र की ओर संकेत करना तथा सार्वजनिक रूप से हँसी-मज़ाक करना जैसी घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा एक महिला कर्मचारी से कथित रूप से "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तुम्हारा बॉयफ्रेंड है क्या?" जैसी व्यक्तिगत एवं अपमानजनक टिप्पणी किए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
संघ का कहना है कि यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षित कार्य वातावरण के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। इसलिए इन आरोपों की जांच कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) तथा सर्वोच्च न्यायालय के Vishaka दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराई जाए।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा असर
संघ ने ज्ञापन में कहा है कि जिन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में केवल एक CHO पदस्थ है, वहां उन्हें प्रत्येक सप्ताह सेक्टर बैठक, फील्ड भ्रमण, हेल्थ मेला, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अभियान एवं अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए स्वास्थ्य केंद्र बंद कर जाना पड़ता है। इससे कई उप-स्वास्थ्य केंद्र सप्ताह में कई दिनों तक बंद रहते हैं और ग्रामीण मरीजों को समय पर ओपीडी, दवा वितरण तथा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पातीं।
CHO पर ही डाला जाता है अतिरिक्त दायित्व
संघ का आरोप है कि जिला स्तरीय समीक्षा, DHS एवं कलेक्टर समीक्षा बैठकों में NHM के TOR के विपरीत अनेक कार्यों की जवाबदेही केवल CHO संवर्ग पर डाली जाती है, जबकि इन कार्यों का निष्पादन विभिन्न संवर्गों का सामूहिक दायित्व है। साथ ही उच्च अधिकारियों के समक्ष CHO संवर्ग की कार्यशैली का कथित रूप से नकारात्मक एवं भ्रामक चित्र प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कर्मचारियों की पेशेवर छवि प्रभावित होती है।
जांच तक CMHO को हटाने की मांग
प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 21, NHM के Terms of Reference, POSH Act, 2013 तथा सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए मांग की है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान CMHO को जांच अवधि के दौरान पद से हटाया जाए अथवा अन्यत्र पदस्थ किया जाए। यदि जांच में आरोप सत्य पाए जाते हैं तो संबंधित सेवा नियमों के तहत कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।
संघ ने शासन से सात दिनों के भीतर प्रभावी कार्रवाई प्रारंभ करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो संगठन अपने सदस्यों के हितों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता की रक्षा के लिए विधिसम्मत एवं शांतिपूर्ण तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।
वर्सन
इन लोगो का शासन से शिकायत हुआ है कि गलत तरीके से इनसेटिव का आहरण किया है, जो जांच के लिये कलेक्टर को आया है, हमें कलेक्टर का निर्देश है कि जांच करे और गलत तरीके से यदि कोई शासन राशि का दोहन किया है तो कार्रवाई करे! एक तो यह कारण हो गया दूसरा यह कि कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते जितने भी राष्ट्रीय कार्यक्रम है जो शासन की योजनाएं हैं जमीनी स्थल पर क्रियान्वयन नहीं करते ! उनके कामों की जब समीक्षा की गई तो औसत से कम उपलब्धियां है जिसे लेकर कलेक्टर मैडम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए इनके वेतन रोकने के निर्देश दियें है ! यही दो मुख्य कारण है और इसी कारण से मेरे ऊपर अनर्गल आरोप लगाया जा रहा है ! इनके द्वारा लगाए गए सारे आरोप निराधार है ! मुझे बदनाम करने की साजिश की जा रही है !
अमृत लाल रोहलेडकर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बेमेतरा
