मामला न्यू सर्किट हाउस, बेरला रोड, बेमेतरा का है, जहां उप मुख्यमंत्री अरुण साव सेवा संकल्प अभियान की समीक्षा बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। समीक्षा बैठक के बाद दोपहर 2:30 बजे प्रेस वार्ता निर्धारित होने की जानकारी पत्रकारों को दी गई थी। इसके चलते प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पहुंच गए।
लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी प्रेस वार्ता शुरू नहीं हुई। पत्रकार इंतजार करते रहे। करीब डेढ़ घंटे बाद प्रेस वार्ता के बजाय प्रेस ब्रीफिंग की सूचना सामने आने से मौके पर मौजूद मीडिया प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई। पत्रकारों का कहना था कि जब उन्हें प्रेस वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया था, तो फिर अंतिम समय में कार्यक्रम का स्वरूप बदलने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए था।
सवाल पूछने के लिए पहुंचे थे पत्रकार, सिर्फ सुनने के लिए नहीं
मीडिया प्रतिनिधियों की आपत्ति केवल देरी को लेकर नहीं बताई जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि प्रेस वार्ता का उद्देश्य ही सवाल-जवाब और संवाद है। जिले में सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासनिक व्यवस्था और अन्य जनसरोकार से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर पत्रकार उप मुख्यमंत्री से सीधे सवाल करना चाहते थे।
ऐसे में प्रेस वार्ता के स्थान पर ब्रीफिंग रखे जाने से सवाल पूछने और जवाब हासिल करने का अवसर सीमित होने की स्थिति बनी। इसी को लेकर नाराज पत्रकारों ने कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय वापस लौटना उचित समझा।
पहले भी हो चुका है ऐसा, अब फिर वही स्थिति
खास बात यह है कि प्रेस वार्ता को लेकर बेमेतरा में पत्रकारों की नाराजगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 1 अगस्त 2026 को उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बेमेतरा प्रवास के दौरान भी मीडिया ब्रीफिंग को लेकर पत्रकारों में असंतोष सामने आया था।
उस समय पत्रकारों को शाम 4 बजे मीडिया ब्रीफिंग के लिए बुलाया गया था। पत्रकार निर्धारित समय पर पहुंच गए, लेकिन उप मुख्यमंत्री के पहुंचने में देरी के कारण उन्हें करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद हुई प्रेस वार्ता कुछ ही मिनटों में समाप्त हो गई थी।
उस घटना के बाद पत्रकारों ने सवाल उठाया था कि जब मीडिया प्रतिनिधियों को लंबे इंतजार के बाद बुलाया जाता है, तो क्या उन्हें जिले से जुड़े महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर सवाल पूछने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलना चाहिए?
अब एक बार फिर निर्धारित समय के बाद प्रेस वार्ता के बजाय ब्रीफिंग की सूचना सामने आने से उस पुराने घटनाक्रम की चर्चा भी शुरू हो गई है।
मीडिया संवाद की जगह सिर्फ सूचना तक सीमित न हो प्रेस वार्ता
पत्रकारों का कहना है कि मीडिया का काम केवल सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी प्रकाशित करना नहीं है। जनता से जुड़े सवालों को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने रखना भी पत्रकारिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
प्रेस वार्ता में पत्रकारों को सवाल पूछने का अवसर मिलता है, जिससे सरकार और जनप्रतिनिधियों के दावों तथा जमीनी मुद्दों के बीच संवाद स्थापित होता है। यदि कार्यक्रम केवल तैयार जानकारी देने तक सीमित हो जाए और सवाल-जवाब के लिए पर्याप्त समय न मिले, तो मीडिया संवाद की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इस बार पत्रकारों ने दिया साफ संदेश
इस बार पत्रकारों ने कार्यक्रम से वापस लौटकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है, लेकिन पत्रकारों के कार्यक्रम से लौटने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि प्रेस वार्ता की घोषणा, समय निर्धारण और वास्तविक कार्यक्रम के स्वरूप में स्पष्टता क्यों नहीं रही?
बेमेतरा में लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों के बीच अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले समय में मीडिया से संवाद के लिए क्या व्यवस्था अपनाई जाती है। पत्रकारों की अपेक्षा स्पष्ट है—समय का सम्मान हो, प्रेस वार्ता का स्वरूप स्पष्ट हो और जनहित के सवाल पूछने के लिए पर्याप्त अवसर मिले।
