परिवार की नजरों में गलत साबित होने के डर से महिला ने गढ़ी मनगढ़ंत कहानी, पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट में नहीं हुई गर्भावस्था व प्रसव की पुष्टि
दो बार गर्भपात के बाद परिवार से छिपाई सच्चाई
पुलिस के अनुसार, ग्राम जेवरा-एस निवासी 20 वर्षीय तीजन वर्मा ने 4 अक्टूबर 2026 को नवागढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 3 अक्टूबर को उसके सास-ससुर और देवर मरनी कार्यक्रम में बाहर गए थे, जबकि उसका पति बकरियां चराने तालाब की ओर गया था। घर में अकेली रहने के दौरान दो अज्ञात महिलाएं आईं, दवा पिलाकर उसका प्रसव कराया और नवजात शिशु को अपने साथ ले गईं।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। शुरुआती तौर पर मामला गंभीर होने के कारण पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कराया और फोरेंसिक टीम की भी मदद ली।
पूछताछ में खुली झूठी कहानी की परतें
जांच के दौरान पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ की। घटनास्थल की बारीकी से जांच तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर शिकायत में कई संदेहास्पद तथ्य सामने आए। पुलिस ने कथित रूप से नवजात को ले जाने वाली अज्ञात महिलाओं की तलाश के साथ शिकायतकर्ता से भी लगातार पूछताछ की।
जांच में सामने आया कि विवाह के बाद महिला के दो बार गर्भवती होने के बावजूद गर्भपात हो गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में तीसरी बार गर्भ ठहरने और फिर गर्भपात होने के कारण उसे आशंका थी कि परिवार के लोग उसे गलत समझेंगे। इसी डर से उसने खुद को गर्भवती बताना शुरू कर दिया। परिजनों को विश्वास दिलाने के लिए वह साड़ी को दोहरा मोड़कर पहनती थी, ताकि पेट गर्भवती महिला जैसा दिखाई दे।
आलता-माहुर लगाकर रची प्रसव की कहानी
पुलिस के मुताबिक, 3 अक्टूबर को परिवार के सदस्यों के घर से बाहर रहने के दौरान महिला ने अपने शरीर पर आलता-माहुर रंग लगाकर प्रसव होने जैसी स्थिति दर्शाई। पति के घर लौटने पर उसने दावा किया कि पेट में दर्द होने पर गली के दरवाजे के पास पहुंची, जहां एक अज्ञात महिला खड़ी थी। मदद मांगने पर वह दूसरी महिला को लेकर आई और दवा पिलाकर प्रसव कराने के बाद बच्चे को अपने साथ ले गई।
इसी मनगढ़ंत कहानी के आधार पर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। हालांकि, पुलिस की लगातार जांच और पूछताछ में कहानी की सच्चाई सामने आ गई।
मेडिकल जांच में भी नहीं मिले गर्भावस्था और प्रसव के प्रमाण
पुलिस ने महिला का चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच कराई। पुलिस के अनुसार, चिकित्सकीय रिपोर्ट में घटना से लगभग चार-पांच सप्ताह पूर्व तक गर्भवती होने अथवा प्रसव होने की पुष्टि नहीं हुई। पूछताछ के दौरान महिला ने अपने माता-पिता, सास-ससुर, पति और गांव के अन्य लोगों की मौजूदगी में अपनी गलती स्वीकार करते हुए बताया कि न तो उसका प्रसव हुआ था और न ही कोई नवजात बच्चा दो अज्ञात महिलाएं लेकर गई थीं।
संपूर्ण विवेचना और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने शिकायत को झूठा पाया। इसके बाद महिला के विरुद्ध बीएनएस की धारा 217 के तहत इस्तगाशा तैयार कर कार्रवाई की गई।
एसपी के निर्देशन में हुई कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. हरीश यादव के मार्गदर्शन और एसडीओपी बेमेतरा भूषण एक्का के नेतृत्व में मामले की जांच की गई। कार्रवाई में नवागढ़ थाना प्रभारी निरीक्षक दुलेश्वर चंद्रवंशी, संबलपुर चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक कृष्ण कुमार क्षत्री, साइबर सेल प्रभारी मयंक मिश्रा, प्रशिक्षु उप निरीक्षक कल्पना महंत सहित थाना, चौकी और साइबर सेल के पुलिसकर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बेमेतरा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी घटना के संबंध में पुलिस को सही और तथ्यात्मक जानकारी दें। झूठी सूचना या मिथ्या रिपोर्ट दर्ज कराने से बचें, क्योंकि इससे पुलिस के संसाधन अनावश्यक रूप से खर्च होते हैं और वास्तविक मामलों की जांच प्रभावित हो सकती है।
