एमसीएच की उपलब्धियों का गुणगान, मरका नवजात मौत मामले में कार्रवाई का इंतजार! प्रशासन की प्राथमिकताओं पर उठे सवाल

एक ओर 1465 प्रसव का आंकड़ा जारी कर स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना, दूसरी ओर मरका मामले में छह दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने का ग्रामीणों का आरोप; जवाबदेही को लेकर बढ़ी नाराजगी


बेमेतरा टाइम्स । जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर दो तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक ओर जिला प्रशासन मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) में एक अप्रैल से अब तक 1465 प्रसव होने का आंकड़ा जारी कर स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकीय टीम की उपलब्धियों का बखान कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मरका प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के मामले में छह दिन बीतने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लग रहा है। इस विरोधाभास ने प्रशासन की प्राथमिकताओं और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एमसीएच की उपलब्धियों को लेकर जारी प्रेस विज्ञप्ति में विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की तत्परता, जटिल प्रसव के प्रबंधन तथा सुरक्षित मातृत्व सेवाओं की सराहना की गई है। निश्चित रूप से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित प्रसव किसी भी जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य विभाग अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से सामने रख रहा है, तब मरका में नवजात की मौत के मामले में उठे गंभीर सवालों का स्पष्ट जवाब कब दिया जाएगा?

1465 प्रसव की उपलब्धि, लेकिन मरका मामले में जवाबदेही कहां?

एमसीएच में अप्रैल से अब तक 1465 प्रसव होने का दावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया है। प्रशासन ने इसे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों के भरोसे और विशेषज्ञ चिकित्सकों के योगदान से जोड़कर प्रस्तुत किया है। दूसरी ओर, मरका स्वास्थ्य केंद्र में नवजात की मौत के बाद परिजनों ने प्रसव के दौरान लापरवाही और मौत की जानकारी समय पर नहीं देने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के अधीन है।

मामले को लेकर परिजन और ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और आंदोलन की चेतावनी दी थी। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धियां गिनाने की नहीं, बल्कि गंभीर शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है।

उपलब्धियों का प्रचार जरूरी, लेकिन शिकायतों पर जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी

स्वास्थ्य सेवाओं में अच्छा काम करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों की सराहना होनी चाहिए। लेकिन किसी अस्पताल में बेहतर प्रदर्शन का दावा दूसरे स्वास्थ्य केंद्र में उठे सवालों का विकल्प नहीं बन सकता। मरका मामले में ग्रामीणों की मुख्य मांग संबंधित कर्मचारियों को बर्खास्त करने की है, हालांकि ऐसी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर ही होनी चाहिए।

प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जांच किस स्थिति में है, अब तक क्या तथ्य सामने आए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए क्या समयसीमा निर्धारित की गई है। यदि जांच पूरी नहीं हुई है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक करने से लोगों के बीच पारदर्शिता और भरोसा बढ़ सकता है।

मरका मामले में अब जवाब का इंतजार

नवजात की मौत से जुड़ा मामला एक संवेदनशील विषय है, जिसमें पीड़ित परिवार को जवाब मिलना और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। एमसीएच की उपलब्धियों का प्रचार अपनी जगह है, लेकिन मरका मामले में उठे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन मरका मामले में जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करेगा, या ग्रामीणों को अपने सवालों के जवाब के लिए फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक विश्वसनीयता केवल उपलब्धियों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि शिकायतों पर निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही से भी तय होती है।

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