तीनों कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए दिए गए थे तीन दिन, गुरुवार को पूरी हुई समयसीमा, शुक्रवार को प्रस्तावित कार्रवाई के बीच संघ ने सौंपा आवेदन—अब विभाग के निर्णय पर निगाहें
कार्रवाई की समयसीमा के बीच संघ का आवेदन, उठे सवाल
16 अक्टूबर 2026 को जारी संघ के पत्र में कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध निर्णय लेने से पहले घटना की परिस्थितियों, चिकित्सकीय अभिलेखों, जच्चा-बच्चा कार्ड, ड्यूटी रोस्टर और संबंधित कर्मचारियों के कथनों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। संघ ने संबंधित कर्मचारियों के कार्य अनुभव को ध्यान में रखने, उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देने और लापरवाही प्रमाणित होने पर ही नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण पिछले कई दिनों से कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध जता रहे थे और प्रशासन को समयसीमा भी दी गई थी। अब जब विभागीय प्रक्रिया में जवाब मांगने की अवधि पूरी हो चुकी थी और कार्रवाई की बात सामने आ रही थी, उसी दौरान कर्मचारी संघ का आवेदन सामने आया है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि संघ ने अपना पक्ष पहले क्यों नहीं रखा? हालांकि, आवेदन देर से दिए जाने के पीछे संघ की मंशा को लेकर बिना प्रमाण कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
संघ के आवेदन में नर्सिंग ऑफिसर कु. रेशमी, एएनएम रजनी भारती और महिला वार्ड आया के लंबे सेवा अनुभव का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों ने कई वर्षों तक सेवाएं दी हैं और उनके द्वारा एक हजार से अधिक प्रसव कराए जाने की जानकारी संघ को प्राप्त हुई है। संघ का कहना है कि घटना दुखद है, लेकिन किसी कर्मचारी के विरुद्ध निर्णय लेने से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
दूसरी ओर, नवजात के परिजन पहले ही प्रसव के दौरान कथित लापरवाही और मौत की जानकारी समय पर नहीं देने के आरोप लगा चुके हैं। ग्रामीणों ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम भी किया था। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होनी है।
अब सीएमएचओ के फैसले पर टिकी निगाहें
मामले में जांच के बाद तीनों कर्मचारियों को नोटिस देकर जवाब देने का अवसर दिए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कर्मचारियों के जवाब, जांच रिपोर्ट और संघ के आवेदन पर विचार करने के बाद स्वास्थ्य विभाग क्या निर्णय लेता है।
एक ओर कर्मचारी संघ निष्पक्ष जांच और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर पीड़ित परिवार और ग्रामीण मामले में जवाबदेही तथा कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। विभाग के सामने चुनौती है कि न तो किसी कर्मचारी के साथ बिना पर्याप्त आधार के अन्याय हो और न ही गंभीर शिकायत के मामले में कार्रवाई अनावश्यक रूप से लंबित रहे।
फिलहाल संघ के आवेदन के बाद विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। मरका मामले में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय ही यह तय करेंगे कि परिजनों के सवालों का जवाब मिलता है या मामला और लंबा खिंचता है।

