24 घंटे में कार्रवाई के आश्वासन पर उठे सवाल, जीवनदीप समिति की बैठक अधिकारियों की अनुपस्थिति में स्थगित; कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
24 घंटे का आश्वासन, पांच दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार
नवजात की मौत के बाद परिजनों ने प्रसव के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही और घटना की जानकारी छिपाने के आरोप लगाए थे। मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया था, जब आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में धरना देने के बाद पड़कीडीह के पास बेमेतरा-नवागढ़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया था। अधिकारियों की समझाइश और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई के आश्वासन के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ था।
लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद पांच दिन गुजर जाने और जांच के बाद भी जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी देरी को लेकर बुधवार को फिर अस्पताल में ग्रामीणों की भीड़ जुटी और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की।
अधिकारियों की गैरमौजूदगी, जीवनदीप समिति की बैठक स्थगित
इसी मामले के बीच बुधवार को मरका स्वास्थ्य केंद्र में जीवनदीप समिति की बैठक भी आयोजित की गई थी, लेकिन अधिकारियों के उपस्थित नहीं होने के कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी। ग्रामीणों ने इस पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जब मामला इतना गंभीर है और लोगों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं, तब महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों का उपस्थित नहीं होना प्रशासन की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कार्रवाई में देरी से लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
जांच के दौरान तीनों कर्मचारी कर रहे थे ड्यूटी, विरोध के बाद छुट्टी पर भेजा
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि नवजात की मौत के मामले में जिन तीन कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है, वे जांच अवधि के दौरान भी अस्पताल में ड्यूटी कर रहे थे। ग्रामीणों के विरोध के बाद तीनों कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया। हालांकि, इस संबंध में विभागीय आदेश और छुट्टी पर भेजे जाने के आधिकारिक कारणों की पुष्टि होना बाकी है।
गुरुवार शाम तक कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
लगातार हो रही देरी से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने मौखिक रूप से स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि गुरुवार शाम तक मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रशासन को अल्टीमेटम देने के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन की स्थिति बनने पर इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
फिलहाल नवजात की मौत के कारणों और स्वास्थ्यकर्मियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। लेकिन पांच दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने की बात को लेकर उठ रहे सवालों ने मामले को फिर गरमा दिया है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों की चेतावनी के बाद कोई ठोस कदम उठाता है या विवाद और गहराता है।
