उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन अपनी जायज मांगों—विशेष रूप से पेंशन वृद्धि—को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं। स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इन मांगों को “जायज” बताते हुए कहा था कि “यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो हमें पाप लगेगा।” लेकिन 15 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जिला अध्यक्ष ने अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में दिव्यांग पेंशन ₹5,000 प्रतिमाह और तेलंगाना में ₹6,000 प्रतिमाह दी जा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों को मात्र ₹500 प्रतिमाह मिलते हैं। इतना ही नहीं, पिछले पांच महीनों से वह राशि भी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि सरकार महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को ₹1,000 प्रतिमाह सम्मानपूर्वक दे रही है, जिसका संघ स्वागत करता है, लेकिन समाज के सबसे जरूरतमंद और आश्रित वर्ग दिव्यांगों को ₹500 के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
दिव्यांग संघ ने सरकार से मांग की है कि “सुशासन” का वास्तविक अर्थ साबित करते हुए तत्काल पेंशन वृद्धि, बकाया भुगतान और लंबित मांगों पर संवेदनशील निर्णय लिया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
