ग्राम अंधियारखोर और पड़कीडीह के बीच हाफ नदी पर बना लगभग 52 वर्ष पुराना पुल आज भी उसी पुराने स्वरूप में उपयोग किया जा रहा है। जबकि पूरी सड़क को आधुनिक और चौड़ी बनाया जा रहा है, वहीं इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नए हाई लेवल ब्रिज के निर्माण को लेकर न तो निर्माण एजेंसी गंभीर दिखाई दे रही है और न ही लोक निर्माण विभाग तथा सेतु विभाग कोई पहल करता नजर आ रहा है। हालत यह है कि नई चमचमाती सड़क का पूरा ट्रैफिक भविष्य में इसी जर्जर और संकरे पुल के भरोसे छोड़ दिया जाएगा, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
जानकारी के अनुसार बेमेतरा-नवागढ़ मार्ग पर हाफ नदी स्थित यह लगभग 300 फीट लंबा पुल तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन के समय वर्ष 1971 से 1974 के बीच लोक निर्माण विभाग द्वारा मात्र 5 लाख 40 हजार रुपये की लागत से हेम्प सेतु जलमग्न पुल के रूप में बनाया गया था। बीते पांच दशकों से यह पुल बिना किसी बड़े जीर्णोद्धार के लगातार भारी वाहनों और बढ़ते यातायात का दबाव झेल रहा है।
आज स्थिति यह है कि बेमेतरा से नवागढ़ होते हुए मुंगेली और बिलासपुर की ओर जाने वाले हजारों लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर इस पुल से गुजरने को मजबूर हैं। कबीरधाम जिले से निकलने वाली हाफ नदी क्षेत्र की सबसे गहरी नदियों में गिनी जाती है, जिसका जलस्तर सड़क और जमीनी सतह से काफी नीचे रहता है। ऐसे में यहां छोटे और पुराने पुल के सहारे यातायात संचालित करना बेहद खतरनाक माना जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां मजबूत एप्रोच रोड और आधुनिक हाई लेवल ब्रिज की सख्त आवश्यकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर पूरी तरह आंख मूंदे बैठे हैं।
चौड़ी सड़क पर संकरा पुल बना खतरे की घंटी, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि जब सड़क चौड़ी की जा रही थी, उसी समय सेतु लोक निर्माण विभाग और ब्रिज कॉर्पोरेशन को नए पुल की योजना तैयार करनी चाहिए थी। यदि चौड़ी और तेज रफ्तार सड़क के बीच पुराना संकरा पुल जस का तस रखा गया, तो दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा। मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुका यह पुल कभी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि करोड़ों रुपये की सड़क परियोजना को अधूरा न छोड़ा जाए और हाफ नदी पर जल्द से जल्द नया हाई लेवल ब्रिज स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़ी जनहानि से बचा जा सके।
वर्सन
“अंधियारखोर - पड़कीडीह पुल पर नए ब्रिज निर्माण हेतु बजट में प्रावधान किया जा चुका है। एस्टीमेट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्यवाही तत्काल शुरू की जाएगी।”
— बीडी सेंडे, एसडीओ, कवर्धा सब डिवीजन सेतु निर्माण विभाग
