पटवारियों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि तहसीलदार की कार्यप्रणाली के कारण कर्मचारियों में भय, आक्रोश, निराशा और मानसिक तनाव का माहौल है। उनका आरोप है कि कर्मचारियों के विरुद्ध की गई प्रशासनिक कार्रवाई को मीडिया में प्रचारित कर उनकी सार्वजनिक छवि एवं सम्मान को भी ठेस पहुंचाई जा रही है, जिससे कर्मचारी मानसिक रूप से आहत हैं।
बैठक में पटवारियों ने कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए। स्वामित्व योजना के अंतर्गत नक्शों के संशोधन के बाद तहसील कार्यालय स्तर पर किए जाने वाले स्कैनिंग, सॉफ्टवेयर संशोधन, प्रिंटिंग एवं अन्य तकनीकी कार्य अब पटवारी स्वयं के खर्च पर नहीं करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय स्तर से ही पूरी कराई जाए।
इसके अलावा विशेष आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर शासकीय अवकाश के दिनों में किसी प्रकार का सरकारी कार्य नहीं करने का निर्णय लिया गया। साथ ही गोपनीय चरित्रावली, सेवा पुस्तिका के संधारण तथा फॉर्म-16 उपलब्ध नहीं कराए जाने जैसी विभागीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया।
पटवारियों का कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, जिससे कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों का मनोबल लगातार गिर रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कर्मचारियों के हित एवं कार्यालयीन वातावरण को सामान्य बनाने के लिए तहसीलदार अनिरुद्ध मिश्रा को तत्काल प्रभाव से बेमेतरा तहसील से हटाया जाए।
राजस्व पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि तीन दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो तहसील बेमेतरा के समस्त पटवारी शासकीय व्हाट्सएप समूहों का बहिष्कार करते हुए हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ज्ञापन की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, राजस्व पटवारी संघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष को भी आवश्यक कार्रवाई एवं मार्गदर्शन हेतु प्रेषित की गई है।
