मितानिन कार्यकर्ताओं ने सरकार से चुनावी घोषणा पत्र “मोदी की गारंटी 2023” में किए गए वादों को तत्काल पूरा करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मितानिन कर्मचारियों के मानदेय/क्षतिपूर्ति में 50 प्रतिशत वृद्धि की जाए तथा मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अंतर्गत संविलियन किया जाए।
धरना-प्रदर्शन के दौरान मितानिन संघ ने मितानिन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी बाहरी निजी संस्था (एनजीओ) को दिए जाने का भी कड़ा विरोध किया। संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि मितानिन कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा संवेदनशील और जमीनी स्तर का कार्य है, जिसे ठेका प्रथा या निजी संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने शासन से मांग की कि मितानिन कार्यक्रम में लागू ठेका व्यवस्था को समाप्त किया जाए।
मितानिन संघ का कहना है कि प्रदेशभर में वर्षों से कार्यरत मितानिन कर्मियों ने ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। कोविड काल से लेकर टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, जनजागरूकता और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक मितानिनों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व नहीं मिल पाया है।
संघ ने कहा कि मितानिन कार्यक्रम में अधिकांश महिलाएं कार्यरत हैं और इनका एनएचएम में संविलियन महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। साथ ही 24 वर्षों के अनुभव को देखते हुए शिक्षा, आयु और रोस्टर में वन टाइम रिलेक्सेशन देकर मितानिन कर्मचारियों को संविलियन का लाभ दिया जाना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन के बाद मितानिन संघ की ओर से मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपी गई, जिसमें प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार मितानिन कर्मचारियों के साथ किए गए वादों को पूरा करे और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बने इन जमीनी कार्यकर्ताओं को आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे।
मितानिन संघ की प्रमुख मांगें
- मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) अंतर्गत संविलियन किया जाए।
- सभी मितानिन कर्मचारियों के मानदेय/क्षतिपूर्ति में 50 प्रतिशत वृद्धि की जाए।
- मितानिन कार्यक्रम को निजी संस्था/एनजीओ के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था समाप्त कर ठेका प्रथा बंद की जाए।
मितानिन संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
