CHO संघ की शिकायत के बाद CMHO डॉ. अमृतलाल रोहलेडकर ने रखा पक्ष ; कहा– गलत इनसेंटिव की जांच और कार्रवाई से बचने के लिए लगाए जा रहे हैं आरोप, झूठ साबित होने पर करेंगे मानहानि का दावा
CMHO डॉ. रोहलेडकर ने कहा कि कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) आहरण किए जाने की शिकायत राज्य शासन को प्राप्त हुई थी। यह मामला जांच के लिए जिला कलेक्टर के पास आया, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देशानुसार जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी के द्वारा शासन की राशि का गलत तरीके से आहरण किया जाना पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कई कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करते तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। कार्यों की समीक्षा में कई कर्मचारियों की उपलब्धियां औसत से कम पाई गईं, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित कर्मचारियों के वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं।
CMHO का कहना है कि इन्हीं प्रशासनिक कार्रवाइयों से बचने और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप झूठे साबित होते हैं तो वे संबंधित लोगों के विरुद्ध मानहानि का दावा दायर करेंगे।
महिला स्टाफ और मितानिनों ने किया समर्थन
इधर, CMHO के समर्थन में जिला समन्वयक मितानिन सहित बड़ी संख्या में मितानिनें एवं स्वास्थ्य विभाग की महिला कर्मचारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे नियमित रूप से CMHO के साथ बैठकों में शामिल होती हैं, लेकिन उनके साथ कभी भी किसी प्रकार का अनुचित या अपमानजनक व्यवहार नहीं हुआ।
अब जांच पर टिकी सभी की नजर
एक ओर प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने CMHO पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर CMHO ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे प्रशासनिक कार्रवाई से बचने का प्रयास बताया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के महिला कर्मचारियों एवं मितानिनों का खुलकर समर्थन सामने आने से मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है।
अब इस पूरे प्रकरण में जिला प्रशासन एवं राज्य शासन द्वारा कराई जाने वाली जांच के निष्कर्ष पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह समाचार दोनों पक्षों के बयानों पर आधारित है। मामले की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच के बाद ही होगा।

