दो छात्र घायल होने के बाद उच्चस्तरीय जांच शुरू, अधिकारियों को नोटिस... लेकिन बड़ा सवाल—20 फरवरी 2026 को गठित जांच समिति की रिपोर्ट आखिर कहां है?
घटना में प्रवेश (पिता चन्द्रशेखर) एवं पारस (पिता सुरेश) घायल हुए हैं। संबंधित भवन का मरम्मत कार्य मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत वर्ष 2023 में कराया गया था। अब इसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में है।
जांच समिति में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता डी.के. चंदेल, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अनुविभागीय अधिकारी अमर सिंह पैंकरा, सीजीएमएससी के उप अभियंता कमल सिन्हा तथा मंडी बोर्ड के उप अभियंता परवेज बेग को शामिल किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय के प्रधान पाठक सहित विकासखंड शिक्षा अधिकारी, विकासखंड स्रोत समन्वयक और संबंधित संकुल समन्वयक से भी स्पष्टीकरण तलब किया है। वहीं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) के कार्यपालन अभियंता को मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत कराए गए मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता को लेकर 24 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल—पहली जांच रिपोर्ट का क्या हुआ?
यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत वर्ष 2022-23 में हुए करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की जांच रिपोर्ट का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है।
जिला प्रशासन ने 20 फरवरी 2026 को पूरे जिले में जतन योजना के अंतर्गत हुए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के लिए संयुक्त समिति का गठन किया था। जांच में अतिरिक्त कक्ष निर्माण, भवनों का जीर्णोद्धार, शौचालय तथा किचन शेड की मरम्मत जैसे कार्य शामिल थे। समिति को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
जांच के दायरे में नवागढ़ के 254, साजा के 208, बेरला के 195 और बेमेतरा के 159 विद्यालय शामिल किए गए थे। प्रत्येक विकासखंड में एसडीएम से लेकर लोक निर्माण विभाग के उप अभियंताओं तक अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाई गई थी।
अब उठ रहा बड़ा सवाल
करीब पांच महीने बीत जाने के बाद भी पूर्व में गठित समिति अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं कर सकी। ऐसे में गुवारा स्कूल हादसे के बाद प्रशासन द्वारा सात दिनों में जांच पूरी करने के निर्देश दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूर्व में गठित जांच समिति की रिपोर्ट समय पर सामने आती और गुणवत्ता संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई होती, तो शायद गुवारा जैसी घटना टाली जा सकती थी।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार सात दिन में जांच पूरी होगी और दोषियों पर वास्तविक कार्रवाई होगी, या फिर यह रिपोर्ट भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?
