प्रधानमंत्री आवास की राह देखते-देखते थके हितग्राही, खुद के पैसे से बना लिया घर, अब सूची में नाम आने से बढ़ी नई दुविधा


बेमेतरा टाइम्स । प्रधानमंत्री आवास योजना का वर्षों तक इंतजार करने वाले कई पात्र परिवारों ने आखिरकार मजबूर होकर अपनी जमा-पूंजी, कर्ज या रिश्तेदारों से उधार लेकर स्वयं ही पक्का मकान बनवा लिया। लेकिन अब वर्ष 2026 की नई आवास सूची में इन परिवारों के नाम शामिल होने से नई असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

हितग्राहियों का कहना है कि जब उन्हें समय पर योजना का लाभ नहीं मिला, तब मजबूरी में उन्होंने अपने संसाधनों से घर बना लिया। अब सवाल यह है कि क्या ऐसे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा, या फिर यह कहते हुए उनका नाम सूची से हटा दिया जाएगा कि उनके पास पहले से पक्का मकान है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा है। लोगों का कहना है कि यदि पात्र परिवारों को समय पर आवास स्वीकृत हो जाता, तो उन्हें कर्ज लेकर मकान बनाने की नौबत नहीं आती। अब वे जानना चाहते हैं कि उनकी पात्रता का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा और क्या वर्षों की देरी का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ेगा।

जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अंतिम निर्णय शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों, सत्यापन प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति के आधार पर लिया जाता है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि हितग्राही के पास पहले से पूर्ण पक्का मकान है, तो संबंधित प्रावधानों के अनुसार उसकी पात्रता प्रभावित हो सकती है। वहीं, प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय संबंधित विभाग द्वारा जांच और नियमों के अनुरूप ही किया जाता है।

अब प्रभावित परिवारों की निगाहें प्रशासन और शासन पर टिकी हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों ने केवल योजना में हुई देरी के कारण अपने खर्च से घर बनाया है, उनके मामलों पर मानवीय और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों के साथ अन्याय न हो।

वही मामले में प्रशासन का कहना है कि ग्राम सभाओं में अनुमोदन के बाद सूची अभी मंगाई गई है नियमानुसार भौतिक सत्यापन के बाद पात्र को ही योजना का लाभ दिया जाएगा !

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