बेमेतरा में सोशल मीडिया पर अधिकारियों से बढ़ती नजदीकियों ने पत्रकारिता की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर छेड़ी नई बहस
बेमेतरा। लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी ताकत निष्पक्षता, निर्भीकता और जनता के प्रति जवाबदेही है। लेकिन बेमेतरा जिले में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा चलन तेजी से दिखाई दे रहा है, जिसने पत्रकारिता की पेशेवर मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ पत्रकार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का खुला प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारी के जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य निजी अवसरों पर उन्हें "भैया", "भाभी", "चाचा", "चाची" जैसे पारिवारिक संबोधनों के साथ शुभकामनाएं दी जा रही हैं। इन शुभकामना संदेशों के साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं।
यह प्रश्न केवल शुभकामनाएं देने का नहीं है। सवाल यह है कि जब पत्रकार और अधिकारी के बीच इतनी सार्वजनिक निकटता दिखाई देती है, तब आम नागरिक के मन में निष्पक्ष पत्रकारिता को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। यदि भविष्य में उसी अधिकारी के विभाग में भ्रष्टाचार, लापरवाही या किसी जनहित के मुद्दे पर खबर बनती है, तो क्या पत्रकार बिना किसी दबाव या पक्षपात के उसे प्रकाशित कर पाएगा? यही चर्चा आज जिले में हो रही है।
पत्रकार और अधिकारी के बीच सौहार्दपूर्ण तथा पेशेवर संबंध होना आवश्यक है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों का सार्वजनिक प्रदर्शन पत्रकारिता की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। पत्रकार का पहला रिश्ता किसी अधिकारी से नहीं, बल्कि जनता और सत्य से होना चाहिए।
यह लेख किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर एक विमर्श है। यदि मीडिया की निष्पक्ष छवि कमजोर होती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान जनता के विश्वास को होता है। इसलिए समय की मांग है कि पत्रकारिता की गरिमा, पेशेवर मर्यादा और स्वतंत्रता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि लोकतंत्र का यह महत्वपूर्ण स्तंभ मजबूत बना रहे !
