ज्ञापन में कहा गया कि छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है। चाकूबाजी, हत्या, गैंगवार तथा नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से आम जनता और युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है। संगठन ने पुलिस प्रशासन को राजनीतिक दबाव से मुक्त कर अपराधों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिवसेना (UBT) ने युवाओं की बेरोजगारी, लंबित सरकारी भर्तियों, भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं तथा निजी उद्योगों में स्थानीय युवाओं को 80 प्रतिशत रोजगार देने के नियम के पालन की मांग भी उठाई।
ज्ञापन में किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने, मिलावटी खाद पर रोक लगाने, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, जिला अस्पतालों में डॉक्टरों और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग की गई।
संगठन ने आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा करने, प्रदेश में "बेटा बचाओ, बेटा पढ़ाओ" अभियान चलाने तथा पुरुष आयोग के गठन की मांग भी रखी।
शिवसेना (UBT) ने चेतावनी दी कि यदि जनहित से जुड़े इन मुद्दों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशभर में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
