एक माह ड्यूटी कराई, फिर नौकरी से निकाला और मजदूरी भी दबाई ! आबकारी की मदिरा दुकानों में 11 बेरोजगारों से काम कराने का आरोप

श्रम विभाग में शिकायत, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने उठाई आवाज


बेमेतरा टाइम्स
जिला आबकारी विभाग द्वारा संचालित मदिरा दुकानों में सुरक्षा गार्ड के रूप में करीब 11 बेरोजगारों से एक माह तक काम कराने के बाद मजदूरी का भुगतान नहीं करने और नौकरी से निकालने का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने मामले की शिकायत जिला श्रम पदाधिकारी से करते हुए मई 2026 की बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है।

पीड़ितों के अनुसार उन्हें फस्ट च्वाईस फेसिलिटीज, मेन रोड नैला, जांजगीर (छत्तीसगढ़) के माध्यम से बेमेतरा की कम्पोजिट देशी-विदेशी मदिरा दुकान में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम पर लगाया गया था। आरोप है कि उनसे पूरे एक माह दिन-रात ड्यूटी कराई गई, लेकिन काम पूरा होने के बाद मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें यह कहते हुए नौकरी से हटा दिया गया कि वर्तमान में कोई पद उपलब्ध नहीं है।

पीड़ितों का कहना है कि काम के दौरान उन्हें सुरक्षा गार्ड की वर्दी, पहचान पत्र और नियमित उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी की व्यवस्था दी गई थी। पीड़ितों ने अपनी उपस्थिति से संबंधित दस्तावेजों को शिकायत के साथ साक्ष्य के रूप में संलग्न किया है।

काम पूरा कराया, अब मजदूरी कौन देगा?

श्रम विभाग को दिए आवेदन में पीड़ितों ने कंपनी से एक माह की मजदूरी राशि दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि उन्होंने पूरी मेहनत और ईमानदारी से ड्यूटी की, ऐसे में बिना भुगतान के नौकरी से निकालना उनके साथ अन्याय है।

जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी ने भी उठाया मामला

मामले को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के बेमेतरा शहर अध्यक्ष सूर्य सिंह चौहान ने भी 24 अगस्त को जिला श्रम अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रोजगार के नाम पर जिले के करीब 11 बेरोजगारों को मदिरा दुकानों में गार्ड के रूप में काम कराया गया। पार्टी का कहना है कि पीड़ितों के पास वर्दी, विभागीय पहचान पत्र और उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज हाजिरी जैसे साक्ष्य मौजूद हैं।

सूर्य सिंह चौहान ने श्रम विभाग से मामले की तत्काल जांच कर वास्तविकता सामने लाने तथा पीड़ितों को उनकी बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है।

अब जांच पर टिकी नजर

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि युवकों से नियमित रूप से ड्यूटी कराई गई थी तो उनकी मजदूरी का भुगतान क्यों नहीं किया गया? क्या उन्हें नियमानुसार नियुक्त किया गया था और क्या संबंधित कंपनी ने श्रम कानूनों के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की थीं? इन सवालों का जवाब अब श्रम विभाग की जांच से सामने आने की उम्मीद है।

पीड़ितों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और उनका बकाया मेहनताना जल्द से जल्द दिलाया जाए।

Post a Comment

Previous Post Next Post