प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर कानन पेंडारी की वादियों में कार्यक्रम की शुरुआत जंगल सफारी भ्रमण से हुई। इसके बाद आयोजित काव्य-गोष्ठी में बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़, बलौदाबाजार सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे साहित्यकारों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन नवागढ़-बेमेतरा के सुप्रसिद्ध गायक-कवि जुगेश बंजारे 'धीरज' ने किया। उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराकर आयोजन को राष्ट्रीय चेतना से भी जोड़ दिया।
समारोह का मुख्य आकर्षण पांच पुस्तकों का लोकार्पण रहा। इनमें "अनुभूति" राष्ट्रीय साझा काव्य संकलन विशेष रूप से चर्चा में रहा, जिसमें देशभर के 53 साहित्यकारों की रचनाएं और परिचय प्रकाशित हैं। इसके अलावा संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. किशन टंडन 'क्रांति' की चार नई कृतियां—"दो बूंद स्याही", "सोला आना सच", "मेरी आवाज सुनो" और "हिजगा" का भी भव्य विमोचन किया गया। ये उनकी 78वीं से 81वीं प्रकाशित पुस्तकें हैं, जो उनकी सतत साहित्य साधना का प्रमाण हैं।
इस अवसर पर डॉ. किशन टंडन 'क्रांति' ने बताया कि छत्तीसगढ़ कलमकार मंच के बैनर तले अब तक 84 पुस्तकों का विमोचन हो चुका है, जो महज चार वर्षों में किसी साहित्यिक संस्था द्वारा स्थापित एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लेखनी केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों एवं जिलों से पहुंचे 53 साहित्यकारों को सम्मान-पत्र, मेडल और पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मंच द्वारा सम्मानित साहित्यकारों की कुल संख्या बढ़कर 1544 हो गई, जबकि यह संस्था का 27वां सफल आयोजन रहा।
मुख्य अतिथि एवं सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर विजय कुमार कोशले ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसकी दिशा तय करने वाली शक्ति भी है। उन्होंने अपने साहित्यिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि कविता और लेखनी लोगों के दिलों को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर उनका भी सम्मान किया गया।
काव्य-गोष्ठी में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। प्रकृति की गोद में गूंजती कविताओं ने वहां मौजूद श्रोताओं के साथ-साथ भ्रमण करने आए पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। राहगीर भी रुककर इस साहित्यिक वातावरण का आनंद लेते रहे।
आयोजन में साहित्यकारों ने शिक्षा, संस्कृति, संविधान, सामाजिक समरसता, मानवीय मूल्यों और जन-जागरण पर आधारित रचनाओं के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दिया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष जुगेश बंजारे 'धीरज', प्रचार सचिव मणिशंकर दिवाकर 'गदगद', डॉ. प्यारेलाल आदिले 'तनय', डॉ. गुलाब चंद 'कुसुम' सहित बिलासपुर, बेमेतरा, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़ एवं बलौदाबाजार प्रदेशभर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
जब लेखनी समाज के हित में चलती है, तब वह केवल साहित्य नहीं रचती, बल्कि नई पीढ़ी के लिए विचार, संस्कार और सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव भी तैयार करती है। छत्तीसगढ़ कलमकार मंच का यह आयोजन इसी प्रेरणादायी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।
सहित अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
