ग्रामीणों के अनुसार ग्राम नारायणपुर में कोटवारी सेवा भूमि पर बिना अनुमति व्यावसायिक निर्माण कर ढाबा संचालित किया जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ढाबे में लंबे समय से अवैध शराब बिक्री के साथ गांजा बिक्री जैसी गतिविधियां भी संचालित होने की बात सामने आती रही है। साथ ही बाहरी बसों के रुकने के कारण यात्रियों द्वारा खुले में शौच किए जाने से आसपास के खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायत द्वारा कई बार ढाबा संचालक एवं संबंधित कोटवार को समझाइश दी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों को धमकी दी जाती है तथा उनके खिलाफ झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया जाता है।
ढाबा संचालक की शिकायत पर सरपंच सहित तीन के खिलाफ FIR
इधर, इसी विवाद से जुड़े घटनाक्रम में ढाबा संचालक की शिकायत पर मारो चौकी, थाना नांदघाट क्षेत्र में ग्राम नारायणपुर के सरपंच बिसाहू राम साहू, उपसरपंच टीकाराम साहू एवं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 296, 309(4), 324(5), 115(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
FIR में ढाबा संचालक ने आरोप लगाया है कि 29 जुलाई की रात सरपंच एवं उनके साथ आए लोगों ने भोजन के पैसे को लेकर विवाद किया और कथित रूप से गाली-गलौज एवं तोड़फोड़ की। शिकायत में ढाबे के सामान को नुकसान पहुंचाने तथा काउंटर में रखी नकदी, डीवीआर और वाई-फाई उपकरण ले जाने का भी आरोप लगाया गया है। ढाबा संचालक ने घटना में करीब 5.50 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया है। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई को बताया एकतरफा
मामले में ग्रामीणों का कहना है कि ढाबा संचालक की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की, लेकिन ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से की जा रही शिकायतों और ढाबे से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियों की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी को लेकर ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कोटवारी सेवा भूमि के अभिलेख एवं ढाबा निर्माण की वैधता की जांच कराई जाए। यदि निर्माण अथवा व्यवसायिक संचालन अनधिकृत पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए ढाबा हटाया जाए। साथ ही शराब, गांजा अथवा अन्य कथित अवैध गतिविधियों की स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि सरपंच, उपसरपंच एवं अन्य ग्रामीणों पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। वहीं पुलिस के समक्ष दर्ज प्रकरण में आरोपियों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है। मामले को लेकर गांव में तनाव और असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कोटवारी सेवा भूमि पर ढाबा संचालन की अनुमति एवं भूमि उपयोग वैध है या नहीं तथा दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
