सचिव प्रकाश कोशले के निलंबन को बताया एकतरफा कार्रवाई; ग्राम पंचायत सचिव संघ ने CEO जिला पंचायत को सौंपा ज्ञापन, आदेश निरस्त नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
संघ का कहना है कि ग्राम पंचायत हेमाबंद के सचिव प्रकाश कोशले के खिलाफ पशु संबंधी प्रकरण में बिना नोटिस, बिना कारण बताए और बिना जांच के एकतरफा कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है, जिसे संघ ने अनुचित बताया है।
“पूरी जिम्मेदारी सचिव की नहीं”
ग्राम पंचायत सचिव संघ का तर्क है कि हेमाबंद में हुई घटना के लिए केवल ग्राम पंचायत सचिव की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं है। संघ ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सचिव प्रकाश कोशले का निलंबन आदेश एक सप्ताह के भीतर निरस्त किया जाए, अन्यथा संघ आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
निलंबन नहीं हुआ निरस्त तो अनिश्चितकालीन कामबंद
सचिव संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में जिले के पंचायत सचिव अनिश्चितकालीन कामबंद-कलमबंद आंदोलन शुरू कर सकते हैं। संघ ने कहा है कि इसके बाद उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति संगठन के निर्णय के अनुसार तय की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर जिलेभर के पंचायत सचिव आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
हेमाबंद मामले में पहले ही हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि हेमाबंद में आवारा एवं घुमंतू पशुओं को कथित रूप से अनाधिकृत तरीके से रखे जाने की शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की थी। मौके पर पाए गए 126 पशुओं को सुरक्षित रूप से अन्य गौशालाओं में व्यवस्थापित कराया गया। मामले में दिलीप राय और उसके पुत्र संजय राय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
वहीं, गांव की सरहद में मिले मृत पशुओं की मौत के कारणों की जांच के लिए तीन पशु चिकित्सकों की टीम गठित की गई है। प्रशासन ने आरोपी द्वारा कब्जा की गई शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी पूरी की है।
इसी कार्रवाई के तहत ग्राम पंचायत हेमाबंद के सचिव प्रकाश कोशले को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। अब इसी निलंबन को लेकर पंचायत सचिव संघ ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अब प्रशासन और सचिव संघ आमने-सामने
एक ओर प्रशासन हेमाबंद मामले में जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पंचायत सचिव संघ निलंबन को अनुचित बताते हुए उसे वापस लेने की मांग कर रहा है।
ऐसे में अब निगाहें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या प्रशासन सचिव संघ की मांग मानकर निलंबन आदेश निरस्त करेगा या फिर पंचायत सचिवों का आंदोलन जिले की पंचायत व्यवस्था को प्रभावित करेगा? आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी।
