खुद बनाया भोजन, बच्चों को अपने हाथों से परोसा… राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका आंचल वर्मा की पहल ने रचा अपनत्व का अनूठा अध्याय


बेमेतरा टाइम्स । छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षक सम्मान एवं राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका श्रीमती आंचल वर्मा ने सामाजिक सहभागिता की पहल करते हुए शासकीय प्राथमिक शाला कंन्तेली में ‘न्योता भोज’ का आयोजन किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सहयोग एवं अपनत्व की भावना विकसित करने के साथ विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक एवं समुदाय की सहभागिता से मध्यान्ह भोजन व्यवस्था को और सुदृढ़ करना रहा।

ग्राम कंन्तेली के शासकीय प्राथमिक शाला में आयोजित इस न्योता भोज में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्य जे.एल. धृतलहरे, उप प्राचार्य कमल कपूर बंजारे, व्याख्याता थल्ज साहू, विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती कामिनी महिलांगे, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कमोद ठाकुर, जिला स्रोत समन्वयक नकुल प्रसाद पनागर, विकासखंड स्रोत समन्वयक राजेंद्र साहू, अतिरिक्त स्रोत समन्वयक सतीश शर्मा सहित प्रधान पाठक श्रीमती जांगड़े, प्रधान पाठिका श्रीमती शीतल राजपूत, विद्यालय स्टाफ, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

पहली बार हुआ न्योता भोज, बच्चों में दिखा उत्साह

विद्यालय में पहली बार किसी के द्वारा न्योता भोज का आयोजन किया गया। विशेष रूप से तैयार किए गए भोजन को लेकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। अतिथियों ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया और अपने हाथों से उन्हें भोजन परोसा। शिक्षिका श्रीमती आंचल वर्मा ने स्वयं भोजन तैयार किया, जिसमें छोले की सब्जी, टमाटर की चटनी, वेज बिरयानी, पूरी, पापड़, सलाद एवं मिठाई शामिल थी। बच्चों ने उत्साह के साथ भोजन का आनंद लिया।

इस अवसर पर डायट प्राचार्य जे.एल. धृतलहरे सहित उपस्थित अतिथियों ने शिक्षिका श्रीमती आंचल वर्मा की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में आपसी सहयोग, सहभागिता और सामुदायिक जुड़ाव की भावना को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

व्यवस्थित कक्षा और शिक्षण सामग्री ने भी खींचा ध्यान

न्योता भोज के बाद अतिथियों ने शिक्षिका श्रीमती आंचल वर्मा के अध्यापन कक्ष का निरीक्षण किया। कक्षा में शिक्षिका द्वारा तैयार की गई सहायक शिक्षण सामग्री, कक्षा की व्यवस्था एवं शिक्षण वातावरण का अवलोकन किया गया। अतिथियों ने कक्षा को व्यवस्थित रखने तथा बच्चों के सीखने के लिए तैयार की गई शिक्षण सामग्री की सराहना की।

यह आयोजन विद्यालय में केवल भोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यालय, शिक्षक, विद्यार्थी और समुदाय के बीच सहभागिता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करने वाली सामाजिक पहल के रूप में सामने आया।


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