आवेदक का कहना है कि संबंधित अधिकारी एंव कर्मचारियों से जानकारी के संबंध में पूछताछ करने पर केवल यही कहा जाता है कि सूचना डाक के माध्यम से भेज दी गई है, लेकिन आवेदन किए करीब दो माह बीत जाने के बाद भी अब तक कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
इस पूरे मामले को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब सूचना के अधिकार कानून के तहत तय समय में जवाब देना अनिवार्य है, तब भी अधिकारियों की लापरवाही आम नागरिकों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
RTI कानून की उड़ रही धज्जियां! रजिस्टर्ड डाक छोड़ सामान्य पोस्ट से भेजी जा रही जानकारी
सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत लगाए गए आवेदनों में जवाब देने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कई विभागों द्वारा बड़ी होशियारी दिखाते हुए आवेदकों को जानकारी रजिस्टर्ड पोस्ट या स्पीड पोस्ट से भेजने के बजाय सामान्य डाक से भेजी जा रही है, जिससे जानकारी समय पर आवेदक तक नहीं पहुंच पा रही है।
आवेदकों का कहना है कि विभागीय अधिकारी यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि जानकारी पोस्ट से भेज दी गई है, लेकिन सामान्य डाक होने के कारण उसका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं रहता। ऐसे में आवेदक यह साबित नहीं कर पाता कि उसे जानकारी मिली भी है या नहीं।
सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन सामान्य पोस्ट के जरिए जवाब भेजने से कई मामलों में महीनों तक जानकारी आवेदकों तक नहीं पहुंच रही। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अब मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। वहीं नागरिकों में भी इस रवैये को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
