नवा कलम प्रतियोगिता में राजीव मधुकर ने प्रथम, गायत्री श्रीवास ने द्वितीय तथा दिव्यांशु वर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं सहित सभी चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
द्वितीय सत्र में विधायक दीपेश साहू की उपस्थिति में 'ठोमहा भर मोती', 'पंचतंत्र के मणि' और 'गीत बँधी' पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मंगत रविन्द्र को 'छत्तीसगढ़ के थाथी सम्मान' से सम्मानित किया गया। विधायक दीपेश साहू ने मातृभाषा के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
अंतिम सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए कवियों ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। लोकसंस्कृति, सामाजिक सरोकार और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजन के समापन पर आरूग चौरा के संस्थापक ईश्वर साहू 'आरूग' ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह आयोजन नवोदित प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी होने के साथ छत्तीसगढ़ी साहित्य के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
